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Monday, April 20, 2026
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WPI Inflation दिसंबर 2025 में बढ़कर 0.83 प्रतिशत पहुंची, लगातार दूसरे महीने दिखी तेजी

दिसंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे महीने तेजी देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले नवंबर 2025 में यह दर माइनस 0.32 प्रतिशत और अक्टूबर 2025 में माइनस 1.21 प्रतिशत रही थी। यानी लंबे समय बाद थोक महंगाई सकारात्मक दायरे में लौटी है। उद्योग मंत्रालय के अनुसार इस बढ़ोतरी के पीछे खाद्य उत्पादों के निर्माण गैर खाद्य वस्तुओं खनिजों मशीनरी और उपकरणों के साथ साथ अन्य विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में आई तेजी बड़ी वजह रही है। हालांकि साल दर साल तुलना करें तो दिसंबर 2024 में थोक महंगाई 2.57 प्रतिशत थी जो इस बार उससे काफी कम है। इसके बावजूद लगातार बढ़ोतरी ने नीति निर्धारकों और उद्योग जगत का ध्यान जरूर खींचा है।

खाद्य महंगाई में राहत लेकिन दबाव बरकरार

डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि दिसंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में सालाना आधार पर 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। नवंबर में यही खाद्य महंगाई 4.16 प्रतिशत पर थी। खासतौर पर सब्जियों की कीमतों में दिसंबर में 3.50 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि नवंबर में सब्जियों की महंगाई दर 20.23 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इससे साफ है कि सब्जियों के मोर्चे पर आम लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन इसके बावजूद रसोई से जुड़ी कई अन्य जरूरी चीजों की कीमतें अब भी दबाव में हैं। अंडा दाल और कुछ अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है जिसका असर आम परिवारों के बजट पर पड़ रहा है। यही वजह है कि खुदरा महंगाई में दिसंबर के महीने में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विनिर्माण और गैर खाद्य वस्तुओं ने बढ़ाया दबाव

अगर विनिर्मित उत्पादों की बात करें तो यहां महंगाई नवंबर 2025 के 1.33 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 1.82 प्रतिशत हो गई। इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान महंगे हुए हैं। मशीनरी उपकरण वस्त्र और अन्य तैयार उत्पादों की लागत बढ़ने से थोक महंगाई को और सहारा मिला। वहीं गैर खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में मुद्रास्फीति दिसंबर में 2.95 प्रतिशत रही जबकि नवंबर में यह 2.27 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली के क्षेत्र में भी हल्की तेजी दर्ज की गई जहां महंगाई दर नवंबर के 2.27 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 2.31 प्रतिशत हो गई। ये सभी संकेत बताते हैं कि उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े क्षेत्रों में लागत का दबाव बना हुआ है जो आगे चलकर खुदरा कीमतों पर भी असर डाल सकता है।

खुदरा महंगाई और RBI का आकलन

रसोई की जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर खुदरा महंगाई पर साफ दिखाई दिया। दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई जो तीन महीने का उच्च स्तर है। नवंबर में यह दर 0.71 प्रतिशत थी जबकि सितंबर में 1.44 प्रतिशत दर्ज की गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक खुदरा महंगाई पर खास नजर रखता है और इसी के आधार पर ब्याज दरों पर फैसले करता है। चालू वित्त वर्ष में अब तक आरबीआई रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है और यह दर अब 5.5 प्रतिशत है। पिछले महीने केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई अनुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया था। साथ ही वित्त वर्ष 2025 26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया गया है। जुलाई सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत और अप्रैल जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जरूर बढ़ाया है लेकिन महंगाई के मोर्चे पर संतुलन बनाए रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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