बंगाल में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर रेड मामले की सुनवाई बुधवार, 18 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ईडी की याचिका पर सुनवाई की। ईडी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तलाशी अभियान के दौरान मौके पर पहुंचकर जांच में बाधा डाल रहे थे। इसके जवाब में पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारी के लिए पेश सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि ईडी का इस्तेमाल हथियार की तरह किया गया।
ईडी और ममता बनर्जी का आरोप-प्रत्यारोप
ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि एजेंसी को डराया गया है, उसे हथियार नहीं बनाया गया। सुनवाई की अगली तारीख 18 मार्च तय की गई। पिछले हफ्ते सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई स्थगित हुई थी। 8 जनवरी को I-PAC ऑफिस पर हुई छापेमारी का मुख्य कारण कोयला तस्करी और करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हवाला लिंक की जांच था। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री, राज्य DGP और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की।

ममता बनर्जी का जवाब: पार्टी डेटा सुरक्षित करने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जवाबी हलफनामे में सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि 8 जनवरी को उन्होंने प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट आवास और बिधाननगर स्थित I-PAC ऑफिस का दौरा इसलिए किया क्योंकि उन्हें सूचना मिली कि तलाशी के दौरान तृणमूल कांग्रेस का संवेदनशील राजनीतिक डेटा एक्सेस किया जा रहा था। ममता ने बताया कि उन्होंने ईडी अधिकारियों से विनम्रतापूर्वक अनुमति मांगी और डेटा लेने के बाद वहां से चली गईं। हलफनामे में कहा गया कि पंचनामा रिपोर्ट में भी दर्ज है कि तलाशी शांतिपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से जारी रही।
दुर्भावना और पारदर्शिता पर सवाल
जवाबी हलफनामे में ईडी पर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया गया। कहा गया कि यह छापेमारी 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई थी, जब I-PAC के पास संभावित उम्मीदवारों की सूची और महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद थे। ममता ने PMLA अधिनियम के तहत सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का भी हवाला दिया और कहा कि ईडी ने तलाशी की कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग पेश नहीं की। हलफनामे में दावा किया गया कि न तो पार्टी और न ही इसके पदाधिकारी इस कोयला घोटाले में आरोपी हैं, इसलिए एजेंसी का पार्टी डेटा पर दावा अवैध था।

