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Saturday, April 18, 2026
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सूर्यकुमार यादव और जसप्रीत बुमराह का उदाहरण देकर CJI ने लॉ छात्रों को मार्गदर्शन किया

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार, 28 फरवरी 2026 को गांधीनगर में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की 16वीं कोन्वोकेशन सेरेमनी में वकालत के छात्रों को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी वकील लॉ प्रोफेशन के हर क्षेत्र में निपुण नहीं हो सकता। छात्रों को अपनी क्षमताओं का मूल्यांकन करना चाहिए और उसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर अपनी पहचान बनानी चाहिए। सीजेआई ने इसे समझाने के लिए इंडियन क्रिकेट टीम के बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव और बॉलर जसप्रीत बुमराह का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि टी-20 मैचों में हर खिलाड़ी से उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हर कौशल में माहिर हो।

लॉ प्रोफेशन और टी-20 क्रिकेट में समानताएं

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि टी-20 क्रिकेट में आखिरी ओवर्स में कोई यह उम्मीद नहीं करता कि सूर्यकुमार यादव बोलिंग करें या जसप्रीत बुमराह बल्लेबाजी करें। इसी तरह लॉ प्रोफेशन में भी हर वकील हर क्षेत्र में उत्कृष्ट नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में वकीलों को धीरे-धीरे यह पहचानना चाहिए कि उनकी विशेषज्ञता किस क्षेत्र में है और उसी में अपने करियर को विकसित करना चाहिए। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि जो वकील हर काम को समान रूप से करने की कोशिश करते हैं, उन्हें शायद ही कभी पुरस्कृत किया जाता है।

सूर्यकुमार यादव और जसप्रीत बुमराह का उदाहरण देकर CJI ने लॉ छात्रों को मार्गदर्शन किया

विशेषज्ञता और पहचान की जरूरत

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि प्रसिद्ध वकील अक्सर चुपचाप समय लेकर यह पहचान लेते हैं कि उनकी सोच और क्षमता किस क्षेत्र में सर्वोत्तम दिशा में उपयोग हो सकती है। वह हर चीज को आजमाकर प्रसिद्ध नहीं होते। उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि लॉ प्रैक्टिस में किताबों से मिली सैद्धांतिक समझ और वास्तविक पेशेवर अनुभव में अंतर स्पष्ट होता है। व्यावहारिक अभ्यास में अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यवहारिक बाधाओं को समझना आवश्यक है। छात्र अपने पेशेवर जीवन में इन गुणों का विकास करके ही सफलता हासिल कर सकते हैं।

न्याय व्यवस्था और वकीलों की जिम्मेदारी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि लीगल प्रोफेशन में जनता का विश्वास वकीलों की ईमानदारी और निरंतरता पर निर्भर करता है। हर वकील के निर्णय और पेशेवर रवैये का प्रभाव न्याय व्यवस्था की मजबूती या कमजोरी पर पड़ता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी क्षमता पहचानें और उसी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करके न्याय और कानून की सेवा करें। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि वकीलों की पेशेवर पहचान उनके करियर को लंबी अवधि में स्थापित करती है और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखती है।

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