इंदौर में सड़क सुरक्षा का संदेश अब फिल्मों के जरिए लोगों तक पहुंच रहा है। फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की यातायात जागरूकता पर आधारित दो शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन शहर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के विद्यार्थियों, कलाकारों और गणमान्य नागरिकों के सामने किया गया। फिल्मों की प्रस्तुति और संदेश देने के नए अंदाज ने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींचा।

## वरिष्ठ अधिकारियों ने की फिल्मों की सराहना
इस कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (मुख्यालय एवं क्राइम) राजेश कुमार सिंह, पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं ट्रैफिक) राजेश कुमार त्रिपाठी और यातायात थाना प्रभारी अरविंद सिंह डांगी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने दोनों फिल्मों की खुलकर तारीफ की। अधिकारियों का कहना था कि ये फिल्में प्रभावी और अभिनव हैं, जो कम समय में सटीक और गहरा संदेश देती हैं।
## मनोरंजक अंदाज में दिया गया संदेश
अधिकारियों ने इस बात पर खास जोर दिया कि इन फिल्मों ने अपनी बात मनोरंजक और बिल्कुल अलग अंदाज में रखी है। इसी वजह से इनका संदेश दर्शकों के मन में ठहरने की क्षमता रखता है। अधिकारियों ने आलोक बाजपेयी को इसी तरह की सामाजिक संदेश वाली फिल्में बनाते रहने के लिए प्रोत्साहित भी किया।
## छोटी कहानी, बड़ा असर
आलोक बाजपेयी का कहना है कि आज के तेज रफ्तार डिजिटल दौर में दर्शकों का ध्यान कुछ ही पलों में दूसरी ओर चला जाता है। ऐसे में शॉर्ट फिल्में सामाजिक जागरूकता का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि सीमित समय में मनोरंजन, संवेदना और सामाजिक संदेश को एक साथ पिरोने का प्रयास किया गया है। यातायात जागरूकता जैसे विषय पर रचनात्मक सिनेमा का यह प्रयोग इसलिए भी अहम है, ताकि सड़क सुरक्षा का संदेश सिर्फ नियमों की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार का हिस्सा बन जाए।
## संदेश ऐसा हो जो याद रहे
बाजपेयी ने कहा कि रचनात्मक सोच का मूल उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है, संदेश ऐसा हो जो सिर्फ सुनाई न दे, बल्कि याद भी रहे। सिनेमा की असली ताकत सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि उनकी सोच को प्रभावित करना और समाज को बेहतर दिशा देना भी है। इसी उद्देश्य को अपनी रचनात्मकता का आधार बनाकर सामाजिक सरोकारों पर प्रभावी शॉर्ट फिल्में बनाने वाले बाजपेयी की फिल्म निर्माण शैली को इंदौर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने खूब सराहा। इस कार्यक्रम से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर और भी रचनात्मक प्रयोग देखने को मिलेंगे, जो लोगों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेंगे।

