इंदौर में इस साल कम बारिश के कारण जलसंकट की आहट सुनाई देने लगी है। ज्यादातर बोरिंग ठीक से रिचार्ज नहीं हो पाए हैं, वहीं नदी, नाले और तालाब भी पूरी तरह नहीं भर सके। नतीजा यह है कि शहर के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए नगर निगम को रोजाना करीब तीन सौ टैंकर दौड़ाने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों पर सीलिंग और मौके पर जुर्माने की कार्रवाई भी की जा रही है।


महापौर ने बुलाई जलप्रदाय विभाग की समीक्षा बैठक
पिछले साल की तुलना में इस बार आधी बारिश भी नहीं हुई और मानसून चला गया। पिछले गर्मी के मौसम में शहरवासियों को पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ी थी, और इस बार भी हालात चिंताजनक हैं। इसे देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जलप्रदाय विभाग की एक आपात समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा, अपर आयुक्त आशीष पाठक सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अगले छह महीनों की संभावित पानी की मांग, उपलब्ध जल स्रोतों, टंकियों, बोरिंगों और टैंकर संचालन पर विस्तार से चर्चा हुई, ताकि गर्मी आने से पहले ही सारी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।
भूजल और नीचे गिरने की आशंका
महापौर ने बताया कि इस बार दस से पंद्रह प्रतिशत कम वर्षा होने के कारण भूजल का रिचार्ज ठीक से नहीं हो पाया है। इससे जनवरी और फरवरी में भूजल स्तर के और नीचे जाने की आशंका है। निगम का लक्ष्य हर नागरिक तक पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है। इसके लिए जोन और वार्ड स्तर पर जरूरत के अनुसार टैंकरों, टंकियों और अन्य स्रोतों से जलापूर्ति की रणनीति तैयार की जा रही है। साथ ही निजी हाइड्रेंट और निजी टैंकरों की सूची भी बनाई जा रही है, ताकि मुश्किल हालात में उनका इस्तेमाल प्रभावित इलाकों में किया जा सके।
दिसंबर तक तैयार होंगी पांच नई टंकियां
पेयजल वितरण को सुचारू बनाने के लिए महापौर ने मुख्य टंकियों की क्षमता की समीक्षा के निर्देश दिए। योजना के मुताबिक दिसंबर तक नौलखा, गोंदवाले, आजाद नगर, डाकिया और फल-बाग इलाकों की पांच नई टंकियां पूरी कर ली जाएंगी। इनके चालू होने से करीब तीस एमएलडी यानी तीन करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी रिजर्व रखा जा सकेगा। इसके अलावा फल-बाग क्षेत्र से जुड़ी लगभग बारह से तेरह अन्य टंकियों के रखरखाव और सुधार कार्य भी समय पर पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।


