नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 20 अक्टूबर को ऐलान किया है कि वह 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन अहम मुद्दों — मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), परिसीमन और महिला आरक्षण — पर विस्तार से चर्चा करेंगे। खड़गे ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत तौर पर दो पत्र लिखे हैं और दोनों ही पत्र प्रधानमंत्री तक पहुंच चुके हैं।

तीन मुद्दों पर बताएंगे अपनी चिंताएं
खड़गे के मुताबिक, 21 अक्टूबर को होने वाली चर्चा में वह प्रधानमंत्री के सामने तीन चिंताएं रखेंगे — SIR से होने वाले संभावित नुकसान, परिसीमन की प्रक्रिया के नतीजे और महिला आरक्षण को लागू करने में हो रही देरी। खड़गे ने सवाल उठाया कि महिला आरक्षण को अब तक लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उस दिन राजनीति पर चर्चा नहीं करना चाहते, बल्कि बुधवार को सभी मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग
खड़गे की यह टिप्पणी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के पत्र पर प्रतिक्रिया के दौरान सामने आई। दरअसल, खड़गे ने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की थी कि संसद में प्रस्तावित परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। कांग्रेस का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर आगे बढ़ने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए।
रिजिजू का पलटवार, कांग्रेस पर सहयोग न करने का आरोप
खड़गे के पत्र के जवाब में किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने मार्च और अप्रैल में लिखित संदेशों के जरिए कांग्रेस से इस प्रस्तावित कानून पर सहयोग मांगा था। रिजिजू ने दावा किया कि खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बातचीत के दौरान भी इस मुद्दे पर चर्चा की पहल की गई, लेकिन कांग्रेस ने बैठक के लिए कोई तारीख नहीं दी। रिजिजू के अनुसार, बार-बार अनुरोध के बावजूद बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी, जिसके बाद सरकार को डीएमके, समाजवादी पार्टी, वाईएसआरसीपी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी सहित अन्य दलों से परामर्श करना पड़ा।
संसद के सत्रावसान पर भी सरकार ने दी सफाई
रिजिजू ने मानसून सत्र के 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद 64 दिन तक सत्रावसान नहीं किए जाने पर उठे सवालों को भी खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में संसद के सत्रावसान के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है। उन्होंने 2008 के विश्वास प्रस्ताव जैसे पुराने उदाहरण भी गिनाए, जब सदन लंबे समय तक बिना सत्रावसान के रहा था। रिजिजू ने कांग्रेस से रचनात्मक सहयोग करने और महत्वपूर्ण कानूनों को पारित करने की प्रक्रिया में बाधा नहीं डालने की अपील की है। अब 21 अक्टूबर को खड़गे की ओर से प्रधानमंत्री के सामने उठाए जाने वाले मुद्दों पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

