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Saturday, April 18, 2026
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मोदी सरकार ने मंजूरी दी नई राफेल जेट्स की खरीद, वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा

भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने फ्रांस से नए राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह फैसला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल जेट्स की दमदार भूमिका ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय वायुसेना पाकिस्तान के एयरबेस पर कैसे एयर डॉमिनेंस बनाए रख सकती है। इस नई डील से भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक और डिफेंस क्षमता में और मजबूती आएगी।

राफेल जेट की घातक ताकत और मिसाइल सिस्टम

भारत ने पहले ही 36 राफेल जेट्स खरीदे थे, जो दिसंबर 2024 तक डिलीवर हो गए थे। ये लड़ाकू विमान अंबाला में ‘गोल्डन एरोज’ और हाशिमारा में ‘फाल्कन्स’ स्क्वाड्रनों में शामिल हैं। राफेल जेट्स में Meteor मिसाइल लगी होती है, जो हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइलों में शामिल है। इसकी मारक क्षमता 100 किलोमीटर से अधिक है। इसके अलावा, SCALP मिसाइल से राफेल दुश्मन के बंकर और ठिकानों को 300-500 किलोमीटर दूर से निशाना बना सकता है। हैमर मिसाइल भी इसमें लगी होती है, जो कम दूरी पर मजबूत ढांचों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

मोदी सरकार ने मंजूरी दी नई राफेल जेट्स की खरीद, वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा

राफेल के रडार और सुरक्षा प्रणाली की खासियत

राफेल फाइटर जेट में RBE2 AESA रडार लगाया गया है, जो एक साथ 40 टारगेट्स को ट्रैक करने में सक्षम है। इसके अलावा, SPECTRA सिस्टम भी इसमें मौजूद है, जो जेट को दुश्मन के रडार से बचाने और खतरों को जैम करने में मदद करता है। राफेल में हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले भी है, जिससे पायलट अपने हेलमेट से महत्वपूर्ण डेटा और टारगेटिंग जानकारी तुरंत देख सकता है। ये सभी तकनीकें राफेल को एक अत्याधुनिक और घातक लड़ाकू विमान बनाती हैं।

राफेल-एम डील और भारतीय नौसेना की ताकत

भारत ने अप्रैल 2025 में फ्रांस से 26 राफेल-मरीन जेट्स के लिए भी सौदा किया था, जिसकी कुल लागत 63 हजार करोड़ रुपये थी। ये राफेल-एम जेट विमानवाहक पोतों से उड़ने की क्षमता रखते हैं और विशेष रूप से नौसेना मिशन के लिए तैयार किए गए हैं। इस डील में ट्रेनिंग, हथियार, सिमुलेटर और दीर्घकालिक तकनीकी सहायता शामिल है। राफेल-एम जेट्स को INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर तैनात किया जाएगा। नई राफेल डील के साथ भारतीय वायुसेना और नौसेना दोनों ही क्षेत्र में अपने दुश्मनों के लिए चुनौती और बढ़ा देंगे।

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