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Saturday, April 18, 2026
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Somnath temple पर पहली विदेशी हमले की हजारवीं वर्षगांठ पर PM मोदी का ऐतिहासिक दौरा

Somnath temple: गुजरात में स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग ने विदेशी आक्रमणों के बाद भी अपनी चमक और महत्ता को कभी कम नहीं होने दिया। 1026 में पहले विदेशी आक्रमण के बाद भी यह मंदिर आज भी अडिग और गर्व से खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे और ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में भाग लेंगे। 8 से 11 जनवरी तक मंदिर में अनेक आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने सोमनाथ मंदिर की 1000 साल पुरानी धरोहर और उसकी गरिमा को याद किया। उन्होंने कहा, “सोमनाथ हमारे आत्मसम्मान और अटल साहस की कहानी है, जिसमें भारत के करोड़ों बहादुर बेटे और बेटियों का जीवन समाहित है।”

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सोमनाथ का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सोमनाथ गुजरात के प्राभास पाटन नामक स्थान पर स्थित है और यह भारत की आत्मा का अमर प्रतीक है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सोमनाथ का सबसे पहला उल्लेख ‘सौराष्ट्रे सोमनाथं च…’ इस पंक्ति से होता है, जो इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक श्रेष्ठता को दर्शाता है। सोमनाथ न केवल श्रद्धालुओं का केन्द्र है बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान भी है।

विदेशी आक्रमण और मंदिर का पुनर्निर्माण

प्रधानमंत्री ने बताया कि सोमनाथ मंदिर पर जनवरी 1026 में महमूद गज़नी ने हमला किया था, जिससे यह मंदिर विध्वंस के कगार पर आ गया। यह आक्रमण भारत की संस्कृति और आस्था को नष्ट करने की एक क्रूर कोशिश थी। लेकिन इतिहास गवाह है कि सोमनाथ मंदिर ने कई बार आक्रमणों का सामना किया और हर बार पुनः अपने स्वरूप में पुनर्जीवित हुआ। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण 1951 में हुआ, जो भारत के पुनर्निर्माण और आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया। इस पुनर्निर्माण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है, जिन्होंने 1947 में दीवाली के समय सोमनाथ का दौरा कर इस मंदिर को पुनः स्थापित करने की ठानी थी।

सोमनाथ: एक राष्ट्रीय और आध्यात्मिक धरोहर

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय आत्मा और जीवन शक्ति का प्रतीक है। इस मंदिर ने सदियों से लोगों को जोड़ा है और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को एक अद्भुत शांति और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है। मोदी ने कहा, “सोमनाथ का नाम आते ही मन में एक गर्व और आस्था जागृत होती है। यह हमारे सभ्यता के अक्षय तत्वों में से एक है।” उन्होंने कंवलमुनि कैलिकल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य के दर्शन का भी उल्लेख किया, जिन्होंने सोमनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की थी। सोमनाथ की यह परंपरा और इसकी अमरता भारत की अस्मिता को सशक्त करती है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

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