Union Budget 2026-27: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। इस बजट को लेकर शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक कई बड़े बदलावों और निवेश की उम्मीद की जा रही है। खासतौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर, शोध और विकास, तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाने की मांग जोर पकड़ी है। वहीं, शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और कौशल विकास पर भी विशेष फोकस की उम्मीद है। पिछली वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटन बढ़ाकर लगभग 99,858 करोड़ रुपये किया गया था, जो इससे पहले के वर्ष की तुलना में करीब 9.8 प्रतिशत अधिक था। इस बार भी इसी रफ्तार से स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती देने की संभावना जताई जा रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और सुधार की जरूरत
आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी. आर. सोदानी का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश जरूरी है। वे कहते हैं कि मानव संसाधन विकास, डिजिटल टेक्नोलॉजी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बहुत जरूरी है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि आम लोगों पर पड़ने वाले जेब से होने वाले खर्चों में भी कमी आएगी। डॉ. सोदानी ने यह भी बताया कि प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से इस क्षेत्र में कुशल और योग्य प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सकेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर प्रबंधन और शोध एवं विकास में तेजी आएगी। इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को क्रांतिकारी बदलाव दे सकता है।
शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और कौशल विकास पर जोर
शिक्षा क्षेत्र में भी पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 1,28,650 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो पिछले वर्ष से लगभग 6.5 प्रतिशत अधिक था। इस राशि में स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण बजट शामिल था। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, ग्रेटर नोएडा के डिप्टी डायरेक्टर पंकज प्रिया के अनुसार, शिक्षा क्षेत्र में केवल छात्रों की संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि अब उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों को इंडस्ट्री 4.0, जेनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के अनुरूप विकसित करना जरूरी हो गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इस दिशा में कदम बढ़ाने का आग्रह करती है और 2025 तक आधे से अधिक छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य रखती है।
शिक्षा में सुधार की अगली सीढ़ी: गुणवत्ता और रोजगारोन्मुख परिणाम
पंकज प्रिया के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में कॉलेजों की संख्या में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और सकल नामांकन अनुपात (GER) 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 28.4 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, अब शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बजट 2026 के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता, गहन शोध क्षमता और रोजगारोन्मुख परिणामों पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। यह बजट भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने और नवाचार-केंद्रित बनाने का अवसर है। पंकज प्रिया ने कहा कि नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देकर और अत्याधुनिक तकनीकों पर केंद्रित सरकारी पहलों के माध्यम से देश की शिक्षा प्रणाली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

