अभिनेत्री Yami Gautam बॉलीवुड की उन कलाकारों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अपनी सादगी, दमदार अभिनय और मेहनत के बल पर एक खास पहचान बनाई है। यामी ने 4 जून 2021 को फिल्ममेकर आदित्य धर के साथ हिमाचल प्रदेश में बेहद निजी समारोह में शादी की थी। साल 2024 में उनकी ज़िंदगी में एक नया और खूबसूरत मोड़ आया, जब वह मां बनीं और उन्होंने अपने बेटे वेदविद को जन्म दिया। मां बनने के बाद यामी की प्राथमिकताएं बदली हैं, लेकिन इसके बावजूद वह अपने काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की पूरी कोशिश कर रही हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में यामी ने मातृत्व, काम और गर्भावस्था के दौरान शूटिंग के अनुभव को लेकर दिल से बातें साझा कीं।
मातृत्व और करियर के बीच संतुलन पर यामी का नजरिया
‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ से बातचीत के दौरान Yami Gautam ने कहा कि मां बनने के बाद महिलाओं के मन में जो सबसे गहरी भावना पैदा होती है, वह है अपराधबोध। उन्होंने कहा, “गिल्ट सिर्फ एक शब्द नहीं है, यह एक भावना है और इसे नज़रअंदाज़ करना बहुत मुश्किल होता है।” यामी ने बताया कि जब एक महिला काम और बच्चे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है, तो अक्सर समाज और खुद के मन में यह सवाल उठता है कि कहीं वह अपने बच्चे के साथ अन्याय तो नहीं कर रही। ऐसे में खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना बेहद जरूरी होता है। यामी के मुताबिक, मां बनने का मतलब यह नहीं कि महिला को अपने सपनों और पहचान को पीछे छोड़ देना चाहिए।
मां की सलाह बनी सबसे बड़ा सहारा
Yami Gautam ने इस बातचीत में अपनी मां की अहम भूमिका का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह खुद को अपराधबोध से घिरा हुआ महसूस कर रही थीं, तब उनकी मां ने उन्हें बेहद सशक्त सलाह दी। यामी की मां ने उनसे कहा, “मैं तुम्हारी मां हूं और हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी। अगर तुम्हें काम करना पसंद है, तो तुम पूरी ज़िंदगी काम कर सकती हो। इसमें कोई स्वार्थ नहीं है।” इस सलाह ने यामी को यह समझने में मदद की कि मां बनने के बाद भी एक महिला अपने सपनों को जी सकती है। उनकी मां ने यह भी कहा कि बच्चा भगवान का आशीर्वाद होता है और जीवन में यह ईश्वर का दिया हुआ सबसे सुंदर तोहफा है। यह सोच यामी के लिए भावनात्मक मजबूती का आधार बनी।
गर्भावस्था के दौरान शूटिंग का अनुभव
Yami Gautam ने यह भी खुलासा किया कि वह अपनी फिल्म ‘आर्टिकल 370’ की शूटिंग के दौरान गर्भवती थीं। उन्होंने कहा, “आप सोच सकते हैं कि उस वक्त मैं कितनी नर्वस रही होंगी।” शूटिंग का दबाव, सेहत की चिंता और आने वाले बच्चे की जिम्मेदारी—इन सबके बीच काम करना आसान नहीं था। यामी ने माना कि इस दौर में उनकी मां का साथ उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की मदद मिल जाए, लेकिन एक ऐसा इंसान चाहिए जिस पर आप आंख मूंदकर भरोसा कर सकें। मां की मौजूदगी उन्हें भावनात्मक सुरक्षा देती थी। आज यामी मानती हैं कि मां बनने के बाद भी काम कर पाना उनकी मां के सहयोग और विश्वास की वजह से ही संभव हो सका। यामी की यह कहानी उन तमाम कामकाजी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।

