Bank Loan Deposit Ratio: हाल के समय में भारतीय बैंकों में लोन और जमा राशि के बीच असंतुलन की स्थिति देखी जा रही है। बैंक लोन देने की गति जमा राशि आकर्षित करने की तुलना में कहीं अधिक तेज़ हो गई है। दिसंबर तिमाही में बैंकिंग क्षेत्र का लोन-टु-डिपॉजिट रेश्यो (LDR) रिकॉर्ड 81 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रही तो बैंकों को जमा पर ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं और नए लोन सस्ते दरों पर देना कम कर सकते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, लोन-डिपॉजिट अनुपात में इस बढ़ोतरी का मतलब है कि भविष्य में बैंकों के पास नए लोन देने के लिए पर्याप्त फंड्स नहीं रहेंगे।
विभिन्न बैंकों की स्थिति में अंतर
देश के विभिन्न बैंकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो लोन और जमा राशि के बीच स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, HDFC बैंक में पिछले साल की तुलना में लोन में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि जमा राशि केवल 11.5 प्रतिशत बढ़ी है। दिसंबर के अंत तक इस बैंक ने ₹28.44 लाख करोड़ का लोन दिया जबकि जमा राशि ₹28.59 लाख करोड़ थी। बैंक ऑफ बड़ौदा में भी लोन 14.57 प्रतिशत बढ़ा जबकि जमा राशि का विकास केवल 10.25 प्रतिशत रहा। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कई बड़े बैंकों में जमा राशि की वृद्धि लोन देने की गति से पीछे है।
पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक की स्थिति
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई है। यहां जमा राशि में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि लोन 11 प्रतिशत तक पहुंच गया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में जमा वृद्धि केवल 3.4 प्रतिशत रही, जबकि लोन में 7.13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि कुछ निजी बैंकों जैसे एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में जमा और लोन की वृद्धि लगभग बराबर या जमा वृद्धि लोन से थोड़ी अधिक रही है, जिससे उनकी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर नजर आती है।
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) का मजबूत प्रदर्शन
बैंकिंग क्षेत्र में लोन-डिपॉजिट अनुपात की चिंता के बीच गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने जबरदस्त प्रगति की है। इस अवधि के दौरान बजाज फाइनेंस ने लगभग 15 प्रतिशत नए लोन दिये। पूनावाला फिनकॉर्प की संपत्ति में साल-दर-साल 77 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस (M&M Finance) का कारोबार भी लगभग 12 प्रतिशत बढ़ा है। इन कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि NBFC क्षेत्र में निवेशकों और ग्राहकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है, जबकि बैंकिंग सेक्टर को जमा राशि की कमी से जूझना पड़ रहा है।

