भोपाल की विशेष POCSO अदालत ने पांच नाबालिगों से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद की सजा दी है और साथ ही 77.64 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में उसके साथी को 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

कैसे सामने आया था मामला
यह मामला 11 जुलाई 2020 की रात का है, जब पांच नाबालिग संदिग्ध परिस्थितियों में मिले थे। इसके बाद हुई जांच में सामने आया कि आरोपी नाबालिगों को काम दिलाने और जन्मदिन मनाने जैसे बहानों से अपने जाल में फंसाता था। आरोपों के मुताबिक, वह छिपे हुए कैमरों से वीडियो बनाकर पीड़ितों को ब्लैकमेल भी करता था। जांच के दौरान एक पीड़ित की आत्महत्या की दुखद घटना भी सामने आई थी।
पहले भी मिल चुकी है उम्रकैद
बताया जाता है कि आरोपी की उम्र करीब 78 साल है। इससे पहले भी उसे नाबालिग से जुड़े एक अलग मामले में 7 मार्च 2022 को उम्रकैद की सजा मिल चुकी थी। ताजा फैसले के साथ ही यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
अदालत के फैसले का संदेश
विशेष अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के प्रति सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। एक साथ कई मामलों में उम्रकैद और भारी जुर्माना इस बात का संकेत है कि ऐसे अपराधों में दोषियों को किसी तरह की रियायत नहीं मिलेगी। फैसले के बाद पीड़ित पक्षों के लिए न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है।
POCSO अदालतें क्यों खास हैं
नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष POCSO अदालतें बनाई गई हैं, ताकि ऐसे संवेदनशील मामलों में तेज और सुरक्षित सुनवाई हो सके। इन अदालतों में पीड़ित की पहचान गुप्त रखी जाती है और मामले को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाता है। भोपाल के इस फैसले में भी अदालत ने एक के बाद एक कई मामलों में सजा सुनाकर यही संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अपराधों में कानून बेहद सख्त है। इस फैसले से दूसरे पीड़ितों को भी आगे आकर शिकायत दर्ज कराने का भरोसा मिलेगा।

