इंदौर। मालवा-निमाड़ को देश के बड़े औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों की कतार में खड़ा करने की तैयारी तेज हो गई है। इंदौर आर्थिक क्षेत्र की योजना के तहत आठ जिलों को एक साझा विकास ढांचे में जोड़ा जाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में इस पूरे इलाके में निवेश, उद्योग और रोजगार की नई लहर आने की उम्मीद जताई जा रही है। इंदौर में आयोजित मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में इस योजना की घोषणा की जानी है। नीति आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह घोषणा औपचारिक रूप लेगी।

आठ जिले, एक आर्थिक क्षेत्र
इस आर्थिक क्षेत्र में इंदौर के साथ उज्जैन, धार, रतलाम, देवास, खरगोन, खंडवा और शाजापुर जिले शामिल होंगे। योजना का मकसद इन जिलों की ताकत को एक साथ जोड़ना है, ताकि उद्योग लगाने वाले निवेशकों को एक ही क्षेत्र में जमीन, कनेक्टिविटी, कुशल श्रमिक और बाजार — सब कुछ एक साथ मिल सके। अधिकारियों का मानना है कि इस एकीकरण से प्रदेश में आठ नए व्यावसायिक जिले तैयार होंगे।
आज की तस्वीर: 3.55 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था
फिलहाल इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था करीब 3.55 लाख करोड़ रुपये की है। मध्यप्रदेश की कुल अर्थव्यवस्था में इस इलाके की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से अधिक है, जबकि राज्य के औद्योगिक निर्यात का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा यहीं से आता है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह करीब 49,262 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यहां की अनुमानित आबादी करीब 1.85 करोड़ है। वित्त वर्ष 2023 में यहां का सकल घरेलू उत्पाद करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि प्रति व्यक्ति आय करीब 1.92 लाख रुपये थी।
2035 तक 45 से 60 हजार करोड़ का निजी निवेश
योजना के तहत वर्ष 2035 तक इस क्षेत्र में 45 से 60 हजार करोड़ रुपये के निजी निवेश की संभावना जताई गई है। इसके साथ 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का सरकारी निवेश भी होगा। लक्ष्य यह है कि 2029 तक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बढ़कर 7 से 8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचे और 2047 तक यह आंकड़ा 57.06 लाख करोड़ रुपये तक जाए। इस विस्तार से 12 लाख से अधिक उच्च-कौशल वाले रोजगार पैदा होने का अनुमान है। मैन्युफैक्चरिंग, कृषि-प्रसंस्करण, ज्ञान अर्थव्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और विश्वस्तरीय पर्यटन को इस क्षेत्र की पहचान बनाने की योजना है।
पीथमपुर से रतलाम तक: उद्योगों का नया नक्शा
औद्योगिक विकास की योजना में पीथमपुर को खास जगह दी गई है। वहां एक हजार एकड़ में ऑटो और ईवी कंपोनेंट पार्क के साथ बैटरी असेंबली और रीसाइक्लिंग पार्क बनेगा। नेट्रैक्स को एशिया के अग्रणी ईवी परीक्षण और प्रमाणन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। रतलाम में फोर्जिंग पार्क और उन्नत औद्योगिक क्लस्टर बनेगा। फार्मा और लाइफ साइंस के लिए पीथमपुर में लाइफ साइंस मैन्युफैक्चरिंग जोन, रतलाम में फार्मा पार्क और उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क प्रस्तावित है। टेक्सटाइल में धार के पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क और रतलाम के टेक्निकल टेक्सटाइल हब पर जोर रहेगा।
खेती, खाने और पर्यटन को भी मिलेगा बल
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में उज्जैन-रतलाम को अंतरराष्ट्रीय फूड प्रोसेसिंग हब बनाने की योजना है। रतलामी सेव और नमकीन के जीआई क्लस्टर के साथ धार में फल व कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर और खंडवा में एक्वा पार्क बनेगा। पर्यटन में महाकालेश्वर-ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सर्किट का विकास होगा। सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन को ग्लोबल स्पिरिचुअल सिटी के रूप में तैयार किया जाएगा, जबकि एकात्म धाम-2, नर्मदा रिवर क्रूज, मांडव-मालवा हेरिटेज ट्रेल और वेडिंग टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।
ज्ञान अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी
ज्ञान अर्थव्यवस्था के तहत आईआईटी इंदौर के निकट आईटी, जीसीसी और एआई इनोवेशन कैंपस बनाने की योजना है। बिजनेस स्कूल और नॉलेज हब का विकास भी प्रस्तावित है। कनेक्टिविटी के लिए करीब 1,100 किलोमीटर का राजमार्ग नेटवर्क, 864 किलोमीटर की रेल अवसंरचना और इंदौर फ्यूचर सिटी का विकास होगा। सूरत और विशाखापट्टनम जैसे स्थापित आर्थिक क्षेत्रों से तुलना में इंदौर क्षेत्र का आकार बड़ा है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय अभी पीछे है — यही वह अंतर है जिसे यह योजना पाटना चाहती है।

