इंदौर। त्योहारी सीजन की रौनक के साथ ही शहर के प्रमुख बाजारों में भीड़ और वाहनों का दबाव बढ़ गया है। राजबाड़ा, जेल रोड, सुभाष चौक, रानीपुरा, सियागंज और सपना संगीता रोड जैसे व्यस्त व्यापारिक इलाकों में खरीदारी के लिए पहुंच रहे लोगों को जाम और पार्किंग की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों की सड़कों पर रोजाना हजारों वाहन खड़े हो रहे हैं, जिससे आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

जेल रोड पर वन-वे की अनदेखी, दोनों ओर खड़े वाहन
प्रदेश के बड़े मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में गिने जाने वाले जेल रोड पर करीब 700 से 800 मीटर के दायरे में 30 से ज्यादा मार्केट और 800 से 1,000 दुकानें हैं। यहां हर दिन 15,000 से अधिक ग्राहक पहुंचते हैं। पार्किंग की पुख्ता व्यवस्था न होने से रोजाना सड़क के दोनों ओर 5,000 से 7,000 वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। लोग वाहन सड़क पर ही छोड़कर चले जाते हैं, जो घंटों वहीं खड़े रहते हैं।
जेल रोड को वन-वे घोषित किया गया है, इसके बावजूद एमजी रोड की तरफ से आने वाले वाहन चालक लगातार गलत दिशा से प्रवेश कर रहे हैं। मौके पर ट्रैफिक पुलिस या प्रशासनिक अमला मौजूद न होने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और आए दिन वाहन चालकों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है।
सपना संगीता रोड पर फुटपाथ पर कब्जा, पैदल चलना मुश्किल
शहर के प्रमुख फैशन हब के रूप में उभरे सपना संगीता रोड पर भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यहां कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स और ब्रांडेड स्टोर्स में आने वाले ग्राहकों के लिए पार्किंग की जगह बेहद कम पड़ रही है। व्यावसायिक परिसरों के बेसमेंट में बनी पार्किंग मुख्य रूप से स्थानीय दुकानदारों के वाहनों से भरी रहती है या वहां अवैध कब्जे हो चुके हैं।
इस कारण ग्राहक अपने वाहन सड़कों और फुटपाथों पर खड़े करने को मजबूर हैं, जिससे पैदल चलने वाले लोगों का गुजरना भी दूभर हो गया है। त्योहारी खरीदारी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि बाजारों में आने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
दोनों बाजारों में रोज 20,000 से ज्यादा खरीदार
जेल रोड और सपना संगीता रोड को मिलाकर लगभग 1,000 से 1,200 दुकानें और 30 से अधिक मार्केट मौजूद हैं, जहां प्रतिदिन 20,000 से ज्यादा लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। इन क्षेत्रों की सड़कों पर रोज 10,000 से 12,000 वाहन खड़े किए जा रहे हैं। यातायात विशेषज्ञ अतुल शेठ के अनुसार, ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन और नगर निगम को मिलकर इन क्षेत्रों में निरंतर और सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
शेठ का कहना है कि केवल एक-दो दिन कार्रवाई करने या नोटिस देने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। गलत दिशा से आने वाले वाहनों पर तत्काल प्रभाव से जुर्माना और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। ट्रैफिक पुलिस भी इन दिनों मुख्य बाजारों से गायब नजर आ रही है, जिससे प्रमुख चौराहों, सड़कों और बाजारों की व्यवस्था दुकानदारों और रहवासियों के भरोसे छोड़ दी गई है। खरीदार परेशान हो रहे हैं और जिम्मेदार नजर नहीं आ रहे।

