सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 26 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी शेयरों में बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले। सेंसेक्स 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत गिरकर 72,990.04 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 75.60 अंक यानी 0.33 प्रतिशत फिसलकर 22,524.40 पर आ गया।

आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी सबसे कमजोर रहा और इसमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम, रियल्टी, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सीमेंट और ऑटो इंडेक्स भी 1 प्रतिशत तक नीचे आए। दूसरी तरफ निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.49 प्रतिशत चढ़ा, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर से जुड़े शेयरों में मजबूती दिखी।
कच्चा तेल नरम, लेकिन ऊंचा बना हुआ है
जिंस बाजार में ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई भी 2 प्रतिशत से अधिक फिसलकर 100.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि ब्रेंट की कीमत थोड़ी नरम जरूर हुई है, लेकिन यह अब भी ऊंचे स्तर पर है, जिससे बाजार की तेजी पर लगाम लग सकती है। उनका मानना है कि निवेशकों को गिरावट में मिली वैल्यू-बाइंग के मौकों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन ऊंचे कच्चे तेल से जुड़े मैक्रो जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मिडकैप-स्मॉलकैप में करेक्शन की वजह
विश्लेषकों ने बताया कि पिछले हफ्ते मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज करेक्शन की बड़ी वजह मार्जिन पर लिए गए सौदों की बिकवाली रही। मार्जिन-फंडेड ट्रेड के बंद होने से बाजार के छोटे शेयरों में दबाव बढ़ा। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस करेक्शन से चुनिंदा तेज ग्रोथ वाले सेगमेंट में मौके भी बन रहे हैं। ग्लोबल एआई ट्रेड के ठंडा पड़ने का भारत को फायदा भी मिल रहा है — हाल के महीनों में दक्षिण कोरिया और ताइवान से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी भारत से ज्यादा रही है।
पिछले सत्र में एफआईआई-डीआईआई का रुख
इससे पहले के कारोबारी सत्र यानी 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 887 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार चौथे सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 3,236 करोड़ रुपये के शेयर लिए। एशियाई बाजारों में भी सोमवार को सतर्क शुरुआत देखने को मिली, क्योंकि तेल की कीमतें छह महीने के उच्च स्तर से नीचे आई हैं और निवेशक इस हफ्ते होने वाली केंद्रीय बैंकों की बैठकों और कंपनियों के तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जो एआई की अगुवाई वाली तेजी की असली परीक्षा ले सकते हैं।

