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Monday, October 26, 2026
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इंदौर: AI से आंखों की बीमारी की जल्दी पहचान, गांवों तक पहुंचेगी स्क्रीनिंग सुविधा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आंखों की बीमारियों की शुरुआती पहचान में बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। इंदौर में आयोजित मध्य प्रदेश राज्य नेत्र रोग सोसायटी के 49वें वार्षिक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले पांच सालों में एआई की मदद से आंखों की जांच और स्क्रीनिंग मरीजों के घर के और करीब पहुंच जाएगी, खासकर दूर-दराज के गांवों में। सम्मेलन का अंतिम दिन रविवार को था, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग शहरों से 700 से ज्यादा नेत्र रोग विशेषज्ञ शामिल हुए।

इंदौर AI आंखों की जांच

गांवों के मरीजों को होगा सबसे ज्यादा फायदा

सम्मेलन में एक सत्र इस बात पर केंद्रित था कि एआई किस तरह आंखों की बीमारियों की स्क्रीनिंग और पहचान को आसान बना सकता है। डॉ. मीता जोशी ने कहा कि दूर के गांवों में रहने वाले लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों और अस्पतालों तक जाना पड़ता है, जो कई बार मुश्किल होता है। पैसे की कमी भी एक बड़ी बाधा बन जाती है। एआई आधारित सिस्टम से गांव के पास ही नियमित जांच हो सकेगी, जिससे बीमारी शुरुआती दौर में पकड़ में आएगी और जरूरत पड़ने पर मरीज को समय पर विशेषज्ञ के पास भेजा जा सकेगा।

तीन दिन तक चली चर्चा, 700 से ज्यादा डॉक्टर शामिल

तीन दिन तक चले इस सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों ने इलाज की आधुनिक विधियों, नई तकनीकों और नेत्र विज्ञान में एआई की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। अंतिम दिन तकनीकी सत्रों के साथ क्विज प्रतियोगिता और डेमोंस्ट्रेशन वर्कशॉप भी आयोजित की गईं। डॉ. आरएस चौधरी ने बताया कि एआई पर हुए सत्र में इसकी मौजूदा उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से बात हुई। उनका मानना है कि अगले पांच सालों में आंखों की जांच में एआई का इस्तेमाल काफी बढ़ जाएगा, जिससे कई मरीजों को शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

बच्चों में बढ़ता मायोपिया भी चर्चा में

सम्मेलन में बच्चों में बढ़ते मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष का मुद्दा भी उठा। चेन्नई के अरविंद आई इंस्टीट्यूट की डॉ. नीलम माहेश्वरी ने कहा कि मायोपिया किसी एक कारण से नहीं होता, बल्कि यह कई कारणों से जुड़ी स्थिति है। जीवनशैली में बदलाव और पर्यावरण प्रदूषण भी इससे जुड़े कारक हैं। उन्होंने बच्चों के लिए बाहर खेलने और खुली जगह में समय बिताने की अहमियत पर जोर दिया और बचाव के लिए 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी — यानी लगातार 20 मिनट तक नजदीक का काम करने के बाद 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें।

सोसायटी के नए अध्यक्ष चुने गए डॉ. चौधरी

सम्मेलन के अंतिम दिन मध्य प्रदेश राज्य नेत्र रोग सोसायटी के चुनाव भी हुए, जिसमें डॉ. आरएस चौधरी को अध्यक्ष चुना गया। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई, डिजिटल हेल्थ और नई तकनीकों के मेल से आने वाले सालों में आंखों की देखभाल की पहुंच गांव-गांव तक बढ़ेगी और शुरुआती जांच से गंभीर बीमारियों को समय पर रोका जा सकेगा।

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