नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को ऐलान किया कि देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कराया जाएगा। इनमें कई ऐसे राज्य भी हैं, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। आयोग ने इस पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि तय किया है।


किन राज्यों में होगा SSR
आयोग ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखा है। इन सभी जगहों पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक तय कार्यक्रम के तहत होगा।
इस पुनरीक्षण का मकसद पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ना है। खास तौर पर युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों को सूची में शामिल करने पर जोर रहेगा। साथ ही सूची में मौजूद प्रविष्टियों में सुधार और संशोधन भी किया जाएगा, ताकि सूची ज्यादा सटीक और अद्यतन बने।
चुनाव वाले राज्यों पर नजर
जिन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, वे भी इस सूची में शामिल हैं। 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है। वहीं 60 सदस्यों वाली मणिपुर, 40 सदस्यों वाली गोवा, 117 सदस्यों वाली पंजाब और 70 सदस्यों वाली उत्तराखंड विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर खत्म होगा।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव करा सकता है। इसी पृष्ठभूमि में मतदाता सूची का अद्यतन होना अहम माना जा रहा है।
किन राज्यों में बाद में होगा कार्यक्रम
आयोग ने साफ किया है कि जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जहां अभी SIR होना बाकी है, वहां भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम उचित समय पर घोषित किया जाएगा।
पूरा कार्यक्रम क्या है
SSR के तय कार्यक्रम के अनुसार मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और पुनर्व्यवस्थापन 2 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। एकीकृत मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन 12 नवंबर को होगा। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 12 नवंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगी। इन दावों और आपत्तियों का निपटारा 28 दिसंबर तक किया जाएगा और मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 4 जनवरी को होगा।
आयोग ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी के तहत मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन करने या सुधार करने के काम में लगे किसी भी अधिकारी को आयोग के अधीन प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा। इस दौरान वे आयोग के नियंत्रण, देखरेख और अनुशासन के दायरे में रहेंगे।
अधिकारियों के तबादले पर रोक
चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्देश दिया है कि संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव यह सुनिश्चित करें कि मतदाता सूची के काम में लगे मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, बीएलओ सुपरवाइजर, बीएलओ और अन्य अधिकारियों को पर्याप्त जनशक्ति और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
SSR की अवधि के दौरान मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के रूप में अधिसूचित कोई भी पद खाली न रहे। मसौदा सूची के प्रकाशन की तारीख से लेकर अंतिम सूची के प्रकाशन की तारीख तक SSR प्रक्रिया से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। अगर तबादला जरूरी हो, तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से पूरा कारण बताते हुए प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजना होगा।
आयोग ने कहा कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की यह जिम्मेदारी होगी कि वे सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र नागरिक सूची में शामिल होने से न छूटे और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो या उसमें बना न रहे।
SSR और SIR में क्या अंतर है
संक्षिप्त पुनरीक्षण का मुख्य ध्यान नए पात्र व्यक्तियों को जोड़ने और सामान्य सुधारों पर होता है, जबकि SIR कहीं अधिक व्यापक प्रक्रिया होती है। इसमें पूरे राज्य में घर-घर जाकर सत्यापन करने के अलावा प्रविष्टियों की बारीकी से जांच और बड़े पैमाने पर डेटा का ऑडिट शामिल होता है।
उदाहरण के तौर पर, SSR के तहत यदि कोई मतदाता अपना घर बदलता है, तो उसे अपना पता अपडेट करने के लिए एक फॉर्म भरना पड़ता है। लेकिन SIR में ऐसा नहीं है। SIR के तहत बूथ लेवल ऑफिसर उस पते पर जाते हैं, यह पुष्टि करते हैं कि मतदाता अभी भी वहां रहता है या नहीं और यह भी देखते हैं कि क्या कोई नया व्यक्ति पात्र हो गया है।
गौरतलब है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ और अन्य संगठन कथित वोट चोरी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।


