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Friday, October 16, 2026
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अंतरिक्ष में बनेगा ‘पेट्रोल पंप’: भारतीय स्टार्टअप नवंबर में लॉन्च करेगा सैटेलाइट

नई दिल्ली: एक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप ऐसी तकनीक का प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है, जो भविष्य में सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में ही ईंधन भरने में सक्षम बना सकती है। इससे सैटेलाइट्स की कामकाजी उम्र बढ़ सकती है और ईंधन खत्म होने पर महंगे अंतरिक्ष यानों को बदलने की जरूरत कम हो सकती है।

अंतरिक्ष में सैटेलाइट रिफ्यूलिंग AayulSAT-1A

नवंबर में लॉन्च की तैयारी

ऑर्बिटऐड एयरोस्पेस (OrbitAID Aerospace) नवंबर 2026 में स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) के जरिए करीब 30 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। AayulSAT-1A नामक यह सैटेलाइट डॉकिंग, आंतरिक रिफ्यूलिंग और निरीक्षण क्षमता का प्रदर्शन करेगा, जो अंतरिक्ष में कमर्शियल सर्विसिंग की नींव रखेगा।

ऑर्बिटऐड एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ शक्ति कुमार ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि उपग्रह पूरी तरह से तैयार है। कंपनी अगले सप्ताह ही अंतिम टेस्ट पूरे करने की योजना बना रही है, जिसके बाद इसे लॉन्च की तैयारियों के लिए श्रीहरिकोटा भेज दिया जाएगा। लॉन्च की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन कंपनी ने नवंबर के मध्य के आसपास की संभावित समय-सीमा का संकेत दिया है।

अंतरिक्ष में ‘पेट्रोल पंप’ का विचार

ऑर्बिटल रिफ्यूलिंग के पीछे का विचार बहुत सीधा है। जब किसी सैटेलाइट का ईंधन कम हो जाए, तो उसे छोड़े जाने की बजाय एक सर्विसिंग अंतरिक्ष यान उसके पास पहुंचे, डॉक करे और उसके ईंधन की सप्लाई को फिर से भर दे। इस तरह की क्षमताएं सैटेलाइट के जीवनकाल को बढ़ाने, रिप्लेसमेंट की लागत को कम करने और एक ऐसे भविष्य का समर्थन करने में मदद कर सकती हैं, जहां अंतरिक्ष यानों को हटाने के बजाय उनकी सर्विसिंग की जाए।

हालांकि ये लाभ इस तकनीक के सफल प्रदर्शन और कामकाजी उपयोग के लिए इसके विस्तार पर निर्भर करते हैं। नवंबर में होने वाला ऑर्बिटऐड का मिशन इस दिशा में एक शुरुआती कदम है। कंपनी भविष्य के सैटेलाइट ग्राहकों के लिए कमर्शियल तरीके से उपलब्ध स्पेस सर्विस टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए इन नतीजों का उपयोग करने की योजना बना रही है।

पिछले मिशन से सबक

शक्ति कुमार ने कहा कि आयुसैट-1A अंतरिक्ष में ईंधन स्टेशन बनाने की दिशा में कंपनी का अगला कदम है। उन्होंने बताया कि कंपनी का पिछला मिशन लॉन्चिंग में कुछ गड़बड़ी की वजह से प्रदर्शन चरण तक नहीं पहुंच सका था, लेकिन कंपनी की प्रतिबद्धता मजबूत बनी हुई है।

इस मिशन का मकसद सैटेलाइट के अंदर आंतरिक डॉकिंग, ईंधन भरने और बिजली और डेटा ट्रांसफर को जांचना-परखना है। इसके साथ ही कक्षा में निरीक्षण क्षमता का प्रदर्शन करना भी इसका लक्ष्य है।

2027 के लिए बड़े मिशन की योजना

ऑर्बिटऐड 2027 की पहली तिमाही के लिए एक और अधिक आधुनिक मिशन की योजना बना रहा है। इसमें दो सैटेलाइट शामिल होंगे। एक चेजर और एक टार्गेट। ये संचालन के साथ ही डॉकिंग, ईंधन भरने और अन्य सर्विसिंग क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे।

कंपनी अब सैटेलाइट प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी से जुड़ा एक जेट-पैक प्रदर्शन करने की भी योजना बना रही है। इसका मकसद अन्य कामकाजी सैटेलाइट्स की तरफ बढ़ने से पहले अपने खुद के अंतरिक्ष यान का उपयोग करके पैंतरेबाजी क्षमताओं को सत्यापित करना है।

संस्थापक ने कहा कि कंपनी अन्य कामकाजी सैटेलाइट्स से जुड़े उपयोगों की तरफ बढ़ने से पहले इस तकनीक को सत्यापित करना चाहती है। इसका विचार एक ऐसी प्रोपल्शन क्षमता को विकसित करना है, जो किसी सैटेलाइट को पैंतरेबाजी करने में मदद कर सके या किसी अन्य अंतरिक्ष यान को सहायता प्रदान कर सके।

आगे का कार्यक्रम

2027 के मिशन के लिए निर्माण का काम जारी है। आगामी मिशन के बाद दिसंबर के आसपास इंटीग्रेशन शुरू होने की उम्मीद है। ये दोनों मिशन मिलकर ऑर्बिटऐड को अंतरिक्ष में कमर्शियल सेवाओं की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेंगे। यह एक ऐसा उभरता हुआ क्षेत्र है, जो सैटेलाइट्स के विस्तार और लंबे समय तक टिकने वाले अंतरिक्ष यानों की बढ़ती मांग के साथ तेजी से महत्वपूर्ण हो सकता है।

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