चेन्नई की निजी एयरोस्पेस कंपनी स्पेस जोन इंडिया ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने RRR-1 (रहूमी रीस्टार्ट रॉकेट) के जरिये उड़ान के दौरान रॉकेट इंजन को बंद करके दोबारा चालू करने (मिड-एयर इंजन रीस्टार्ट) का सफल प्रदर्शन किया है। यह प्रयोग मिशन RHUMI TWIN 2026 के तहत 10 अक्टूबर को चेन्नई के पास तिरुविदंथै तटरेखा से किया गया।


17 सेकंड में पूरा हुआ नियोजित क्रम
मिशन टीम के अनुसार, RRR-1 ने नियोजित प्रोपल्शन क्रम सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें नियंत्रित इंजन शटडाउन द्वारा दो पावर्ड-फ्लाइट चरण शामिल थे। रॉकेट का इंजन पहले चरण में लगभग नौ सेकंड तक चला और थ्रस्ट उत्पन्न किया। इसके बाद प्रोपल्शन सिस्टम को जानबूझकर तीन सेकंड के लिए बंद कर दिया गया — इस दौरान वाहन बिना इंजन थ्रस्ट के अपने उड़ान पथ पर आगे बढ़ता रहा।
उड़ान के 12वें सेकंड पर इंजन को दोबारा जलाया गया और वह पांच सेकंड तक चला, जिससे नियोजित 17 सेकंड का क्रम पूरा हुआ। इस तरह प्रदर्शन में तीन सेकंड के बिना-थ्रस्ट अंतराल के साथ कुल 14 सेकंड का पावर्ड इंजन संचालन हुआ। कंपनी ने बताया कि उड़ान में लगे उपकरणों और ट्रैकिंग प्रणालियों ने रॉकेट के प्रक्षेपपथ और प्रोपल्शन प्रदर्शन की निगरानी की।
हाइब्रिड प्रोपल्शन: बंद करना आसान, रीस्टार्ट कठिन
RRR-1 हाइब्रिड रॉकेट प्रोपल्शन तकनीक का इस्तेमाल करता है, जिसमें ठोस ईंधन के साथ अलग से सप्लाई किया गया ऑक्सीडाइजर जोड़ा जाता है। पारंपरिक ठोस-प्रणोदक मोटरों से अलग, हाइब्रिड रॉकेट इंजन को ऑक्सीडाइजर के प्रवाह को रोककर नियंत्रित रूप से बंद किया जा सकता है। हालांकि, रीस्टार्ट क्षमता के लिए बदलती उड़ान स्थितियों में विश्वसनीय रीइग्निशन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त इंजीनियरिंग की जरूरत होती है।
नियोजित क्रम का सफल प्रदर्शन इंजन रीस्टार्ट विश्वसनीयता, इग्निशन प्रतिक्रिया, दहन स्थिरता और प्रोपल्शन प्रदर्शन पर आगे के अध्ययनों के लिए एक प्रायोगिक आधार देता है। यह तकनीक भविष्य में एक ही मिशन में कई इंजन बर्न की जरूरत वाले रॉकेटों का समर्थन कर सकती है, जिससे उड़ान के विभिन्न चरणों के अनुसार प्रोपल्शन का प्रबंधन संभव होगा।
रीयूजेबल रॉकेट और कम लॉन्च लागत की दिशा में कदम
इस क्षमता का सबसे बड़ा संभावित लाभ यह है कि मिशन के चुनिंदा चरणों में ही इंजन चलाकर ईंधन दक्षता बढ़ाई जा सकती है। लगातार एक ही बर्न पर निर्भर रहने के बजाय, रीस्टार्ट-क्षम प्रोपल्शन प्रणालियां प्रक्षेपपथ योजना और प्रणोदक उपयोग में अधिक लचीलापन दे सकती हैं। ऐसी प्रणालियां कई प्रोपल्शन घटनाओं, कक्षीय समायोजनों या नियंत्रित रिकवरी युद्धाभ्यास वाले अनुप्रयोगों में मिशन प्रदर्शन को अनुकूलित करने में मदद कर सकती हैं।
कंपनी का मानना है कि यह तकनीक प्रणोदक दक्षता में सुधार, संचालन लागत में कमी और अधिक किफायती लॉन्च प्रणालियों में योगदान दे सकती है — हालांकि इसके लिए प्रोपल्शन परीक्षणों, वाहन-स्तरीय विश्लेषण और बार-बार उड़ान प्रदर्शनों के जरिये आगे की पुष्टि जरूरी होगी। इंजन रीस्टार्ट क्षमता कई रीयूजेबल रॉकेट आर्किटेक्चरों में एक महत्वपूर्ण विशेषता है, खासकर उनमें जिन्हें रिकवरी और लैंडिंग के लिए अतिरिक्त पावर्ड-फ्लाइट चरणों की जरूरत होती है।
गणमान्य हस्तियों की मौजूदगी, निवेशकों से बातचीत की तैयारी
इस प्रक्षेपण के गवाह तमिलनाडु के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर, पद्मश्री डॉ. मैलस्वामी अन्नादुरै (इसरो सैटेलाइट केंद्र के पूर्व निदेशक) और डॉ. जी. सतीश रेड्डी (DRDO के पूर्व अध्यक्ष) रहे। इसके अलावा इसरो और DRDO के वैज्ञानिक, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और हजारों छात्र भी मौजूद थे। मिशन का नेतृत्व स्पेस जोन इंडिया के संस्थापक और CEO आनंद मेगलिंगम ने मिशन डायरेक्टर के रूप में किया।
सफल प्रक्षेपण के बाद कंपनी अब संभावित निवेशकों और रणनीतिक उद्योग भागीदारों के साथ चर्चा शुरू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित निवेश रणनीति प्रोपल्शन अनुसंधान अवसंरचना को मजबूत करने, अतिरिक्त स्टैटिक-फायर और उड़ान परीक्षण करने और बड़े रीस्टार्ट-क्षम हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित होगी। कंपनी का दीर्घकालिक उद्देश्य भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग में योगदान देना है।


