राजस्थान के भरतपुर जिले से बड़ी खबर आई है, जहां क्रैशर प्लांट के रास्ते को लेकर चल रहे पुराने विवाद ने खूनी रूप ले लिया। इस विवाद में राजस्थान के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत हो गई। वे हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल-स्पीति की डीसी किरण भड़ाना के पिता थे। निधन की खबर मिलते ही डीसी किरण भड़ाना राजस्थान के लिए रवाना हो गईं। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी उनके निधन पर दुख जताया है।


दो साल पुराना विवाद, रविवार शाम को हिंसा
क्रैशर प्लांट के संचालन और खनन लीज तक पहुंचने के रास्ते को लेकर ग्रामीणों और क्रैशर संचालक के बीच करीब दो साल से विवाद चल रहा था। इस मुद्दे पर ग्रामीणों की ओर से विरोध और धरना भी दिए गए थे।
रविवार शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच क्रैशर परिसर में हिंसक घटना हुई। उस समय पहाड़ी पर मशीनों के जरिए खनन कार्य चल रहा था और भड़ाना भी मौके पर मौजूद थे। उनकी पत्नी कमलेश भड़ाना ने आरोप लगाया कि 70 से 80 लोगों ने उनके पति और वहां मौजूद अन्य लोगों पर हमला कर दिया। घटना के बाद गंभीर रूप से घायल अतर सिंह भड़ाना को वैर के उपजिला अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जयपुर रेफर किया गया, लेकिन मध्य रात्रि को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आईजी और एसपी मौके पर पहुंचे और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
भाजपा से बयाना जीते, फिर बसपा और कांग्रेस का सफर
अतर सिंह भड़ाना का राजनीतिक सफर दिसंबर 2001 में भारतीय जनता पार्टी से शुरू हुआ था। भाजपा ने उन्हें राजस्थान किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। संगठन में उनके काम को देखते हुए भाजपा ने 2003 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्हें भरतपुर की बयाना सीट से मैदान में उतारा। इस चुनाव में भड़ाना ने शानदार जीत दर्ज की — उन्होंने 41,377 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी ध्रुवेंद्र सिंह को 19,405 वोटों के बड़े अंतर से मात देकर पहली बार विधानसभा की दहलीज लांघी। वर्ष 2003 से 2008 के अपने कार्यकाल के दौरान वे विधानसभा की जन लेखा समिति (पीएसी) के सदस्य भी रहे।
गुर्जर आंदोलन के बाद भाजपा से टूटा नाता
2007 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान अतर सिंह भड़ाना के भाजपा से संबंध बिगड़ गए। इसके बाद वे 2008 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में शामिल हो गए, लेकिन वहां उनका सफर लंबा नहीं चला। कुछ ही महीनों में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बसपा ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद अक्टूबर 2008 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए।
कांग्रेस ने 2008 के विधानसभा चुनाव में भड़ाना को भरतपुर की नगर सीट से टिकट दिया। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें भाजपा की उम्मीदवार अनीता के सामने 4,584 मतों से हार का सामना करना पड़ा — अनीता को 22,942 वोट मिले, जबकि भड़ाना को 18,358 मत प्राप्त हुए। इस हार के बाद वे प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति से कुछ दूर होकर अपने खनन और क्रैशर कारोबार पर ध्यान दे रहे थे।
IAS बेटी किरण भड़ाना का नाम रोशन किया
किरण भड़ाना अपने पिता दिवंगत पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की सबसे छोटी बेटी हैं और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 2017 बैच की अधिकारी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और पिता के मार्गदर्शन के बल पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे राजस्थान और अपने समाज का नाम रोशन किया था। पिता के निधन की दुखद सूचना मिलने के बाद वे तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गईं।


