चार प्रयोग लेकर जाएगा अंतरिक्ष स्टेशन
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मानव और पौधों के स्वास्थ्य से जुड़े प्रयोग अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हो रहे हैं। ये प्रयोग स्पेसएक्स के 35वें कमर्शियल रीसप्लाई सर्विसेज मिशन यानी सीआरएस-35 के जरिए फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से भेजे जा रहे हैं। इस मिशन में नासा के बायोलॉजिकल एंड फिजिकल साइंसेज डिवीजन के चार शोध शामिल हैं, जिनका मकसद लंबे अंतरिक्ष अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य को बेहतर समझना है। धरती पर भी इन शोधों के नतीजे काम आने की उम्मीद है।


अंतरिक्ष में मानव मस्तिष्क पर क्या असर होता है
पहला प्रयोग मानव मस्तिष्क से जुड़ा है। वैज्ञानिकों के सामने बड़ा सवाल यह है कि अंतरिक्ष में मानव मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता है। इसके लिए प्रयोगशाला में विकसित मानव मस्तिष्क के छोटे मॉडल पांच हफ्तों के लिए अंतरिक्ष स्टेशन भेजे जा रहे हैं। धरती पर रखे गए बिल्कुल समान मॉडलों से तुलना करके यह देखा जाएगा कि छोटी अंतरिक्ष उड़ान मस्तिष्क की कोशिकाओं पर किस तरह असर डालती है।
इस शोध से यह समझने में मदद मिलेगी कि मस्तिष्क तनाव पर कैसे प्रतिक्रिया करता है। भविष्य में चंद्रमा और उससे आगे के अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों के मस्तिष्क स्वास्थ्य के जोखिमों से निपटने के तरीकों की नींव भी इससे रखी जा सकेगी।
फसलों की बीमारी और अंतरिक्ष कृषि
दूसरा प्रयोग अंतरिक्ष में फसलों की बीमारियों से जुड़ा है। इसमें यह जांचा जाएगा कि गुरुत्वाकर्षण की कमी वाली स्थिति में फसलों की बीमारियां तेजी से और ज्यादा गंभीर रूप से विकसित होती हैं या नहीं। धरती पर उगाए गए और अंतरिक्ष स्टेशन पर उगाए गए पौधों को बीमारी फैलाने वाले फफूंद से संक्रमित करके उनके आणविक और संरचनात्मक बदलावों की तुलना की जाएगी।
इन नतीजों से धरती पर बीमारी-प्रतिरोधी फसलों के विकास में मदद मिल सकती है और भविष्य की अंतरिक्ष कृषि में पैदावार के नुकसान को कम किया जा सकेगा। लंबे अभियानों में अंतरिक्ष फसलें पोषण देती हैं, भोजन में विविधता बढ़ाती हैं और अंतरिक्ष यात्रियों को मानसिक तौर पर भी सहारा देती हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड सोखती हैं, ऑक्सीजन बनाती हैं और पानी को रीसाइकिल करती हैं, जो धरती से दूर जाने वाले अभियानों में और भी अहम हो जाएगा।
स्टेशन पर ही होगी नमूनों की जांच
तीसरा प्रयोग एक छोटे माइक्रोप्लेट रीडर का पहला परीक्षण है, जो इस साल की शुरुआत में ही अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच चुका है। कमर्शियली इनेबल्ड रैपिड स्पेस साइंस पहल के तहत यह प्रयोग यह जांचेगा कि यह उपकरण एंटीबॉडी, एंटीजन और प्रोटीन जैसे बायोमार्कर को कितनी अच्छी तरह पहचान और माप सकता है।
अगर यह उपकरण काम कर गया तो वैज्ञानिक नमूनों का विश्लेषण स्टेशन पर ही कर सकेंगे और नतीजे तुरंत मिल जाएंगे। अभी नमूनों को जांच के लिए धरती पर वापस आने का इंतजार करना पड़ता है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों में संक्रमण और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का समय पर पता लगाने में मदद मिलेगी, खासकर उन दूरदराज के अभियानों में जहां सामान की दोबारा आपूर्ति मुश्किल होती है।
सुपरबग पर चौथा और आखिरी चरण
चौथा प्रयोग एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया से जुड़ा है और यह इस शोध का चौथा और आखिरी नियोजित चरण है। इसमें यह देखा जाएगा कि माइक्रोग्रैविटी में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया कैसे जीवित रहते हैं और विकसित होते हैं। अंतरिक्ष यात्री स्टेशन की अलग-अलग सतहों से बार-बार नमूने लेकर दवा-प्रतिरोधी जीवों की निगरानी करेंगे।
इस काम से लंबे अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों को बैक्टीरिया संक्रमण से बचाने के तरीके विकसित करने में मदद मिल सकती है। धरती पर भी इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि एंटीबायोटिक के ज्यादा इस्तेमाल से सुपरबग कैसे विकसित होते हैं।


