इंदौर में मेट्रो ट्रेन का 17 किलोमीटर लंबा रूट संचालित हो रहा है, लेकिन यात्रियों की संख्या बढ़ने का नाम नहीं ले रही। शुरुआत में उम्मीद जताई गई थी कि सुपर कॉरिडोर क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों और टीसीएस-इंफोसिस जैसी आईटी कंपनियों के कर्मचारी मेट्रो का इस्तेमाल करेंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। इन संस्थानों के कर्मचारी आज भी स्टाफ बसों से ही आना-जाना कर रहे हैं।


रोजाना 1500 यात्री भी नहीं
वर्तमान में मेट्रो में दिनभर में 1500 से ज्यादा यात्री सफर नहीं कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें भी ज्यादातर लोग सिर्फ सैर-सपाटे के लिए मेट्रो में बैठ रहे हैं, नियमित यात्री बहुत कम हैं। मेट्रो शुरू होने के शुरुआती दिनों में रोजाना 5000 से अधिक यात्री मिल रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या घटती चली गई। पिछले सितंबर महीने में कुल 40000 यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया।
फेरे घटाने पर विचार
यात्रियों की कमी का सीधा असर मेट्रो के फेरों पर पड़ सकता है। इस समय 17 किलोमीटर के रूट पर दिनभर में 50 से ज्यादा फेरे लग रहे हैं। यदि यात्री संख्या में सुधार नहीं हुआ तो मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन फेरों की संख्या कम करने पर फैसला ले सकता है।
हर महीने 50 लाख का खर्च
मेट्रो के संचालन पर हर महीने 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो रहा है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बिजली का है, उसके बाद कर्मचारियों के वेतन का खर्च आता है। इसके मुकाबले आय न के बराबर है, यानी मेट्रो फिलहाल घाटे में दौड़ रही है।
एयरपोर्ट रूट से उम्मीद
सिंहस्थ मेले से पहले एयरपोर्ट से गांधीनगर तक अंडरग्राउंड रूट को एलिवेटेड रूट से जोड़ने की योजना है। इससे एयरपोर्ट से विजय नगर और रेडिसन तक का सफर आसान होगा और यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि रेडिसन से आगे रूट विस्तार में अभी काफी समय लगेगा। खजराना चौराहे तक का काम पूरा होने में एक साल लगेगा, इसके बाद मेट्रो अंडरग्राउंड होगी। पहले चरण में कुल 31 किलोमीटर का रूट तैयार किया जा रहा है।


