इंदौर के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज में महंगी मशीनों की खरीद को लेकर बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि कॉलेज में पहले से मौजूद एनजीएस मशीन के बावजूद डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने करीब 8 करोड़ रुपये की नई एनजीएस मशीन खरीदने का फैसला किया। इस मामले में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब जांच शुरू कर दी है और डीन को आरोप-पत्र जारी करते हुए विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


आरोप-पत्र में तीन बड़े सवाल
विभाग द्वारा जारी आरोप-पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। पहला, जब 2022 से कॉलेज में एनजीएस मशीन मौजूद है, तो पुरानी मशीन को फिर से चलाने की संभावना परखे बिना नई मशीन के लिए प्रस्ताव क्यों भेजा गया। दूसरा, केंद्र सरकार से मेडिकल डिवाइस रिसर्च यूनिट (एमडीआरयू) के तहत मिले करीब 4 करोड़ रुपये के उपयोग की जांच होगी। तीसरा, मौजूदा धनराशि की स्थिति स्पष्ट किए बिना राज्य सरकार से नई मशीन के लिए लगभग 8 करोड़ रुपये क्यों मांगे गए। सरकार का मानना है कि उपलब्ध संसाधनों की अनदेखी कर अतिरिक्त और टाला जा सकने वाला वित्तीय बोझ पैदा किया गया।
98 लाख के ओटी लाइट प्रकरण में भी रिपोर्ट तलब
एनजीएस मशीन के अलावा करीब 98 लाख रुपये के ओटी लाइट की खरीद का मामला भी जांच के घेरे में है। लोकायुक्त कार्यालय ने इस खरीद को लेकर विभाग से प्राथमिक रिपोर्ट मांगी है। आरोप-पत्र में यह भी दर्ज है कि सर्जरी विभाग के लिए मांगे गए उपकरणों की खरीद नहीं हुई, बल्कि उनसे अलग उपकरण खरीद लिए गए। विभाग को 6 नवंबर 2026 तक प्राथमिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका, 25 अक्टूबर को सुनवाई
इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ता राकेश भाबर ने इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें डीन और टेंडर समिति की अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी।
डीन का पक्ष: भोपाल के निर्देश पर खरीदी, प्रक्रिया का पूरा पालन
वहीं डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया का कहना है कि उन्हें अब तक आरोप-पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उनका दावा है कि मशीन की खरीद भोपाल से मिले निर्देशों के अनुसार और पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई। डीन के मुताबिक पुरानी मशीन वायरस की जांच के लिए उपयुक्त नहीं है।


