इंदौर जिले के सांवेर में करीब दो दशकों से सरकारी शिक्षक की नौकरी कर रहे लगभग 50 शिक्षकों पर अब एफआईआर की तलवार लटक रही है। आरोप है कि इन शिक्षकों ने फर्जी डीएड और बीएड की डिग्री तथा अंकसूचियों के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल की। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कई शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए जाने के दावों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने संकुल प्राचार्यों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


2022-23 में सामने आई थी शिकायत
जानकारी के मुताबिक यह मामला पहली बार वर्ष 2022-23 में शिकायत के रूप में सामने आया था। अब विभाग पुराने रिकॉर्ड को फिर से खंगाल रहा है। शिकायत के बाद हुई कार्रवाई, दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। नियुक्ति से जुड़े पुराने दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। अगर किसी शिक्षक के दस्तावेज फर्जी साबित होते हैं और उन्हीं के आधार पर नौकरी मिलना तय होता है, तो कार्रवाई सिर्फ एफआईआर तक नहीं रहेगी। नौकरी के दौरान मिले वेतन और अन्य सरकारी लाभों को लेकर भी नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।
लोकायुक्त ने मांगा 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड
इस मामले में लोकायुक्त की भूमिका भी अहम हो गई है। लोकायुक्त ने 74 शिक्षकों से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया है। अब विभागीय स्तर पर उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के साथ यह भी देखा जा रहा है कि कितने दस्तावेज संदिग्ध या फर्जी पाए जाते हैं और इतने लंबे समय तक इनका सत्यापन कैसे होता रहा।
शिक्षा विभाग की सत्यापन व्यवस्था कटघरे में
पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग की दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो यह भी तय होगा कि नियुक्ति के समय सत्यापन किस स्तर पर हुआ और कथित गड़बड़ी के बावजूद इतने लंबे समय तक नौकरी कैसे चलती रही। फिलहाल एफआईआर की प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि कितने दस्तावेज फर्जी हैं, कितने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होगी और विभागीय स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय होगी।


