इंदौर जिले में इस बार मानसून की कमजोर रवानगी अब खेतों की रबी तैयारियों पर भारी पड़ रही है। बारिश की कमी से भूजल स्तर नीचे चला गया है और कुएं-नलकूप सूखने की कगार पर हैं। ऐसे हालात में किसान अपनी फसल का चयन खेत की मिट्टी से ज्यादा पानी की उपलब्धता को देखकर कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि जिन किसानों के पास सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था है, वे ही इस बार गेहूं जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसल की बोवनी का जोखिम उठा रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लहसुन और प्याज जैसी नकदी फसलों के रकबे में भी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। किसान अब ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं जो सीमित पानी में तैयार हो सकें। इसी कड़ी में चने की खेती सबसे आगे है, क्योंकि इसे गेहूं की तुलना में काफी कम सिंचाई की जरूरत होती है। किसानों के मुताबिक, कमजोर जल स्रोतों वाले क्षेत्रों में चना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प दिख रहा है।
मंडियों में भी इस बदलाव का असर साफ दिखने लगा है। चने की मांग बढ़ने के साथ ही इसके दामों में तेजी आई है। जानकारों का कहना है कि रबी सीजन में चने के रकबे में बढ़ोतरी की पूरी संभावना है, हालांकि अंतिम तस्वीर बोवनी की रफ्तार के बाद ही साफ होगी।
पानी की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के अध्यक्ष बबलू जाधव के अनुसार, इस समय किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसल का बाजार भाव नहीं, बल्कि खेत तक पानी पहुंचाना है। उनका कहना है कि कुओं और नलकूपों में जल स्तर इतना नीचे चला गया है कि कई किसान बोवनी का निर्णय ही टाल रहे हैं। जिले की लगभग 2.40 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में इस बार पिछले वर्षों जैसा रकबा हासिल करना मुश्किल साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल पर्याप्त सिंचाई सुविधा वाले किसान ही गेहूं की बोवनी कर पाएंगे, बाकी को कम पानी वाली फसलों पर निर्भर रहना होगा।
गेहूं का विकल्प बनता चना
गेहूं, लहसुन और प्याज जैसी फसलों को तैयार होने में बार-बार सिंचाई की जरूरत होती है। कमजोर जल स्रोतों वाले किसान इस जोखिम को उठाने से बच रहे हैं और चने को प्राथमिकता दे रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार चने के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। कुछ किसानों ने तो गेहूं का क्षेत्रफल घटाकर चने की बोवनी की तैयारी शुरू भी कर दी है। दूसरी ओर, मंडियों में चने की मांग बढ़ने से इसके दाम चढ़ने लगे हैं। बाजार आंकड़ों के अनुसार डॉलर चना लगातार महंगा हो रहा है, जबकि देशी चने के भाव में भी तेजी दर्ज की गई है। जानकारों का कहना है कि इस तेजी के पीछे मांग, आवक और त्यौहारी सीजन जैसे कई कारण एक साथ सक्रिय हैं।
इंदौर को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
कम बारिश ने किसानों के सामने फसल चयन का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जिन खेतों में कुएं और नलकूप पर्याप्त पानी दे रहे हैं, वहां रबी की उम्मीद बची हुई है, लेकिन कमजोर जल स्रोतों वाले किसान जोखिम से बच रहे हैं। इन हालात में किसानों ने सरकार से इंदौर को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अगर जल संकट और बोवनी पर खतरा बढ़ता है, तो प्रशासन को समय रहते सर्वे कराकर राहत देने पर फैसला करना चाहिए, ताकि किसानों को समय पर मदद मिल सके।

