इंदौर के व्यापारिक समुदाय में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। अहिल्या चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की अगुवाई में आयोजित एक अहम बैठक में शहर के तमाम व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि एक मंच पर आए और इस शुल्क के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि यदि यह शुल्क वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी अपनी दुकानों से UPI आईडी और QR कोड हटा लेंगे और नकद लेनदेन को ही तरजीह देंगे।


बैठक में सर्वसम्मति से कड़ा फैसला
चैंबर अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कारोबारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रस्तावित शुल्क व्यापार संचालन की लागत बढ़ा देगा। प्रतिनिधियों का कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारी पहले से ही बढ़ती महंगाई, ऊंचे परिचालन खर्च और सिकुड़ते मुनाफे जैसी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। ऐसे में उन पर एक नया आर्थिक बोझ डालना किसी भी लिहाज से उचित नहीं ठहराया जा सकता। बैठक में मौजूद सभी संगठनों ने एक स्वर में इस शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की।
नकद भुगतान को मिलेगी प्राथमिकता
व्यापारियों ने ऐलान किया है कि जब तक सरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़ा यह प्रस्तावित शुल्क वापस नहीं लेती, तब तक वे डिजिटल भुगतान की सुविधा बंद रखेंगे और सिर्फ नकद लेनदेन को प्राथमिकता देंगे। बैठक के दौरान कारोबारियों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की और प्रस्तावित सरचार्ज के विरोध में नारेबाजी भी की।
विरोध सरकार के खिलाफ नहीं, बोझ के खिलाफ
चैंबर नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापारी समाज हमेशा देश के विकास और सरकारी नीतियों के समर्थन में खड़ा रहा है। यह आंदोलन सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अनुचित आर्थिक बोझ के खिलाफ है। कारोबारियों का तर्क है कि अगर यह शुल्क डिजिटल ढांचे के विकास या देशहित के लिए लगाया जाता तो वे इस पर विचार कर सकते थे, लेकिन बैंकों की वित्तीय सेहत सुधारने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत थोपना गलत है।
पांच दिन चलेगा जनसंपर्क अभियान
संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक 23 सितंबर को मनाए गए ‘नो UPI डे’ के बाद आंदोलन को अब और व्यापक रूप दिया जा रहा है। इसके अगले चरण में आगामी पांच दिनों तक शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान दुकानदारों को प्रस्तावित शुल्क के दूरगामी नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा और उन्हें एकजुट रहने का आह्वान किया जाएगा। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि बाजारों से मिलने वाले समर्थन और शासन के रुख के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।


