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Friday, October 16, 2026
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इंदौर जल संकट: हर वार्ड में कुएं-बावड़ी पर हाइड्रेंट, नई जल नीति

इंदौर में इस साल बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, और इसका सीधा असर अब शहर की पेयजल व्यवस्था पर दिखने लगा है। नगर निगम ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो जनवरी के महीने से शहरवासियों को पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इस संभावित संकट से निपटने के लिए निगम ने अभी से कमर कस ली है और शहर के पुराने परंपरागत जल स्रोतों की ओर रुख किया है।

हर वार्ड में कुएं-बावड़ी पर बनेगा हाइड्रेंट

नगर निगम प्रशासन ने फैसला लिया है कि शहर के हर वार्ड में कम से कम एक कुएं या बावड़ी पर हाइड्रेंट बनाया जाएगा। इस हाइड्रेंट के जरिए उसी वार्ड के उन इलाकों में पानी की आपूर्ति की जाएगी, जहां सप्लाई सबसे ज्यादा बाधित रहती है। अधिकारियों को सर्वे करके उपयुक्त कुओं और बावड़ियों को चिह्नित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

वाटर मास्टर प्लान से चिह्नित होंगे समस्याग्रस्त क्षेत्र

महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक, हर वार्ड के लिए एक विशेष वाटर मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस योजना के तहत सबसे पहले उन क्षेत्रों की सूची बनाई जाएगी, जहां नर्मदा जलप्रदाय की मुख्य लाइनें नहीं पहुंचतीं और लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह बोरिंग पर निर्भर हैं। ऐसे इलाकों की कुल जल आवश्यकता का सही आकलन किया जाएगा, ताकि आपूर्ति में कोई कमी न रहे।

यशवंत सागर के लिए नर्मदा-शिप्रा लिंक की मंजूरी

राहत की खबर यह है कि राज्य सरकार ने यशवंत सागर तालाब के सूखने की स्थिति में उसे नर्मदा-शिप्रा लिंक योजना के पानी से भरने की औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इस फैसले से तालाब के जरिए मिलने वाले रोजाना 30 एमएलडी पानी को लेकर बनी चिंता खत्म हो गई है। इसके अलावा ड्रेनेज के उपचारित पानी को नागरिकों तक पहुंचाने के लिए अलग से विशेष टैंकर लगाए जाएंगे, जो निर्माण स्थलों पर पानी की आपूर्ति करेंगे।

जनवरी से वॉशिंग सेंटर बंद, नई जल नीति अगले सप्ताह

जल संरक्षण के लिए निगम ने कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। जनवरी से शहर के सभी वॉशिंग सेंटर बंद करने की योजना बनाई गई है। पानी की बर्बादी रोकने और उसके सही इस्तेमाल के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा। पूरे शहर के लिए एक विस्तृत और नई जल नीति तैयार की जा रही है, जिसे अगले सप्ताह महापौर परिषद की बैठक में पेश किया जाएगा। इसी नई नीति के प्रावधानों के आधार पर इस वर्ष संभावित जल संकट से शहर को उबारने का प्रयास होगा।

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