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Friday, October 16, 2026
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समस्तीपुर के संजय का 502 ग्राम कैमरा अब अंतरिक्ष से देखेगा धरती

बिहार के समस्तीपुर जिले के एक युवा इंजीनियर की तकनीकी प्रतिभा अब अंतरिक्ष से भारत की तस्वीरें खींचने की तैयारी में है। समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी में पले-बढ़े संजय कुमार की सह-संस्थापक और नेतृत्व वाली हैदराबाद की डीपटेक कंपनी EoN Space Labs ने महज 502 ग्राम वजन वाला अत्याधुनिक मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा MIRA अंतरिक्ष तक पहुंचा दिया है। 10 अक्टूबर से यह कैमरा धरती की तस्वीरें और डेटा जुटाने का काम शुरू कर देगा।

समस्तीपुर के संजय का 502 ग्राम कैमरा अब अंतरिक्ष से देखेगा धरती

अंतरिक्ष तक पहुंचा MIRA

MIRA को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से SpaceX के फॉल्कन-9 रॉकेट के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के जरिए 1 अक्टूबर को अंतरिक्ष में भेजा गया। इसे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया गया है, जहां यह टेकमी2स्पेस के MOI-1A ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट के साथ एकीकृत होकर काम करेगा। कंपनी के मुताबिक MIRA में नौ मल्टीस्पेक्ट्रल बैंड और करीब 9.2 मीटर ग्राउंड रिजोल्यूशन की क्षमता है। पारंपरिक कैमरों से आठ गुना कम वजनी होने के बावजूद इसे पृथ्वी की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने के लिए डिजाइन किया गया है।

रेलवे कॉलोनी से अंतरिक्ष तक का सफर

संजय कुमार का बचपन समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी में बीता। उनके पिता शिव बचन समस्तीपुर स्थित डीआरएम कार्यालय में कार्यरत थे। संजय ने शहर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की, 2006 में माध्यमिक और 2008 में उच्चतर माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद कोटा जाकर आईआईटी जेईई की तैयारी की। स्कूली दिनों से ही विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले संजय ने तिरुवनंतपुरम स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी से एवियोनिक्स में बीटेक और आईआईटी मद्रास से फोटोनिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की। पढ़ाई के बाद उन्होंने एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट और अमेरिका के रोचेस्टर मेडिकल सेंटर में आठ साल से अधिक समय तक एडेप्टिव ऑप्टिक्स के क्षेत्र में काम किया। प्रकाश और लेंस की बेहद सटीक इंजीनियरिंग के इसी अनुभव को उन्होंने बाद में अंतरिक्ष तकनीक की ओर मोड़ा।

2022 में तीन इंजीनियरों ने रखी नींव

संजय कुमार ने उज्जैन के पुनीत बदेका और दक्षिण भारत के मनोज कुमार गड्डम के साथ मिलकर 2022 में हैदराबाद में EoN Space Labs की नींव रखी। तीनों संस्थापकों की विशेषज्ञता अलग-अलग क्षेत्रों में थी — संजय ऑप्टिकल सिस्टम डिजाइन, पुनीत प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और मनोज ऑप्टिकल पेलोड इकोसिस्टम तथा रणनीतिक साझेदारियों से जुड़े। कंपनी का लक्ष्य छोटे लेकिन उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड इमेजिंग सिस्टम विकसित करना है, जिनका इस्तेमाल अंतरिक्ष, ड्रोन और ग्राउंड प्लेटफॉर्म में किया जा सके। आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क ने कंपनी को मिनिएचराइज्ड इमेजिंग पेलोड विकसित करने वाली स्पेस एवं एयरोस्पेस कंपनी के रूप में सूचीबद्ध किया है।

खेत, जंगल और सीमाओं तक नजर

MIRA से मिलने वाले मल्टीस्पेक्ट्रल डेटा का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। खेती में फसल की स्थिति और जमीन की नमी का आकलन, प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी, आपदा प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें, जलवायु और पर्यावरण की निगरानी इसके संभावित उपयोग हैं। ईओ/आईआर तकनीक का इस्तेमाल निगरानी और रक्षा क्षेत्र में भी किया जा सकता है। अंतरिक्ष की सफलता के बाद टीम ने अगले मिशन पर काम शुरू कर दिया है — कंपनी भारतीय नौसेना के लिए आईडेक्स-डीआईओ चुनौती के तहत एक स्वदेशी हैंडहेल्ड मल्टीसाइट सिस्टम विकसित कर रही है, जिसका परीक्षण लंबी दूरी तक अलग-अलग लक्ष्यों की पहचान की क्षमता पर किया जा रहा है।

पेरिस में भी बजी तकनीक की धूम

EoN Space Labs की तकनीक अब भारत के बाहर भी प्रदर्शित हो चुकी है। कंपनी को भारत इनोवेट्स 2026 के लिए चुना गया था, जहां उसने फ्रांस के पेरिस में भारतीय डीपटेक और एयरोस्पेस तकनीक का प्रतिनिधित्व किया। समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी से शुरू हुआ संजय कुमार का सफर अब केवल अंतरिक्ष तक पहुंचने तक सीमित नहीं है — उनकी बनाई तकनीक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्वदेशी ऑप्टिकल इंजीनियरिंग की क्षमता भी प्रदर्शित कर रही है।

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