UP News: प्रयागराज को तीर्थस्थलों का राजा कहा जाता है। यहां त्रिवेणी संगम की निरंतर धारा भक्तों के मन में आस्था भरती है। देश के कोने-कोने से लोग इस पावन संगम में डुबकी लगाने आते हैं। यमुना नदी के पवित्र किनारे स्थित है मंकामेश्वर मंदिर, जो भगवान शिव की एक दिव्य उपस्थिति है। यह मंदिर आस्था, इतिहास और पवित्रता का अनुपम संगम है।
शिव पूजा से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
माना जाता है कि भगवान शिव की सच्ची भक्ति और शुद्ध मन से की गई पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर के प्रांगण में कदम रखते ही भक्तों के हृदय में भक्ति की भावना जाग उठती है। सावन के महीने में यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। यमुना के किनारे होने के कारण यहां रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। कहते हैं सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां रुद्राभिषेक करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

त्रेता युग से जुड़ी पवित्र कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी ताकि माता सीता की मनोकामनाएं पूरी हो सकें। तब से यह स्थान सिद्धपीठ के रूप में जाना जाता है। भक्त इस मंदिर में आकर यह विश्वास लेकर जाते हैं कि उनकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी। आज भी यहां भगवान शिव की दिव्य छवि और आशीर्वाद का अनुभव मिलता है जो भक्तों के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक आनंद भर देता है।
मंदिर परिसर की खासियतें
मंकामेश्वर शिवलिंग के अलावा इस मंदिर परिसर में सिद्धेश्वर और रिन्मुक्तेश्वर महादेव के शिवलिंग भी स्थापित हैं। भगवान शिव के अलावा यहां दक्षिणमुखी हनुमान जी की मूर्ति भी विराजमान है।
कैसे पहुंचें मंकामेश्वर मंदिर
यह मंदिर प्रयागराज के नाइनी ब्रिज के पास स्थित है। प्रयागराज जंक्शन से यहां ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा उपलब्ध हैं। मंदिर के पास सरस्वती पार्क भी है जहां आप विश्राम कर सकते हैं। यमुना नदी में नौका विहार का भी आनंद लिया जा सकता है। आसपास कई कैफे भी हैं जहां आप स्नैक्स का स्वाद ले सकते हैं। संगम से भी आप ऑटो या ई-रिक्शा बुक कर सकते हैं।

