कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे करीब 50 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। शनिवार शाम टाउन हॉल के पास जुटे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटाया और कुछ समय तक हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया। प्रदर्शनकारी SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

दो बसों में भरकर ले गई पुलिस
पुलिस ने टाउन हॉल के पास भारी बल तैनात किया था और प्रदर्शन रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। अतिरिक्त पुलिस टुकड़ियां भी इलाके में तैनात रहीं ताकि आगे कोई प्रदर्शन न हो। प्रदर्शनकारियों को दो बसों में भरकर चामराजपेट के मैसूरु रोड स्थित सिटी आर्म्ड रिजर्व (CAR) मैदान ले जाया गया, जहां उन्हें कुछ समय तक हिरासत में रखा गया और फिर रिहा कर दिया गया। भीड़ और भारी पुलिस तैनाती के कारण टाउन हॉल के आसपास कुछ समय तक यातायात भी बाधित रहा।
फ्रीडम पार्क वाला नियम बना वजह
पुलिस की कार्रवाई से पहले एसजे पार्क पुलिस ने आयोजकों का टाउन हॉल के बाहर प्रदर्शन करने का अनुरोध खारिज कर दिया था। पुलिस ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उन दिशा-निर्देशों का हवाला दिया जिनके तहत प्रदर्शन और रैलियों को फ्रीडम पार्क तक सीमित किया गया है। 17 अक्टूबर को जारी एक नोटिस में पुलिस ने हाईकोर्ट के उस आदेश का उल्लेख किया जिसमें प्रदर्शन और रैलियों के लिए फ्रीडम पार्क को तय स्थान बताया गया है। नोटिस में अन्य स्थानों पर प्रदर्शन, रैली, तख्ती प्रदर्शन और सांकेतिक विरोध पर रोक लगाई गई थी और उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। पुलिस ने कहा कि आयोजक जरूरी अनुमति लेकर और कानूनी शर्तें पूरी करके फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर सकते हैं। AISA कर्नाटक के एक सदस्य ने कहा कि बेंगलुरु पुलिस ने टाउन हॉल पर प्रदर्शन की उनकी सूचना को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया था।
दोहरे मापदंड का आरोप
आयोजकों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए अलग-अलग मानदंड अपना रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ गृह मंत्री ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के पक्ष में बात की और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की, वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु में उन्हें प्रदर्शन करने से रोका गया। शहर के सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता नरसिम्हमूर्ति ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब SIR के खिलाफ प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई हुई है। इससे कुछ दिन पहले ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कर्नाटक के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की खबरों पर तीखी आलोचना हुई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पुलिस की कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी थी और गृह मंत्री प्रियांक खर्गे ने पुलिस के रवैये की समीक्षा के आदेश दिए थे। गृह मंत्री ने कहा था कि उन्होंने पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में बाधा न डालने के निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके शनिवार को टाउन हॉल पर प्रदर्शन रोक दिया गया, जिससे एक बार फिर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।

