back to top
Sunday, October 18, 2026
Homeविज्ञाननालंदा विश्वविद्यालय बना ISRO के IIRS का नोडल सेंटर, छात्रों को मुफ्त...

नालंदा विश्वविद्यालय बना ISRO के IIRS का नोडल सेंटर, छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोर्स

बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक की दुनिया से जुड़ने का एक नया अवसर सामने आया है। विश्वविद्यालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतर्गत काम करने वाले भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) का नोडल सेंटर नामित किया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी प्रेस बयान में इस साझेदारी की जानकारी दी गई। इस पहल के बाद छात्र बिना कोई फीस दिए अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े ऑनलाइन पाठ्यक्रम कर सकेंगे।

नालंदा विश्वविद्यालय ISRO

क्या है नोडल सेंटर की व्यवस्था

नोडल सेंटर बनने का मतलब है कि नालंदा विश्वविद्यालय अब IIRS-ISRO के शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए स्थानीय समन्वय केंद्र की भूमिका निभाएगा। इस साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को IIRS-ISRO के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम (DLP) से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इन पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों को कोई फीस नहीं देनी होगी। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है।

कौन-कौन से कोर्स मिलेंगे

इन पाठ्यक्रमों में रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) जैसे विषय शामिल हैं। इनके जरिए छात्र पृथ्वी के संसाधनों का आकलन, भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए छात्रों का किसी विशेष विभाग से होना जरूरी नहीं है। विश्वविद्यालय के सभी विभागों में पढ़ने वाले विद्यार्थी उपलब्ध पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे अलग-अलग शैक्षणिक क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नई तकनीकी दक्षताएं सीखने का अवसर मिलेगा।

ई-क्लास पर होंगी कक्षाएं

विद्यार्थियों को ISRO के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाइव और संवादात्मक ऑनलाइन कक्षाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही पढ़ाई के लिए जरूरी अध्ययन सामग्री भी दी जाएगी। कोर्स की अवधि, उपलब्ध विषयों और समय-सारिणी की जानकारी वर्ष 2026 के आधिकारिक IIRS-ISRO कोर्स कैलेंडर में देखी जा सकती है। लाइव कक्षाओं के जरिए छात्र देशभर के विशेषज्ञों से सीधे सवाल-जवाब भी कर सकेंगे, जिससे उनकी समझ और गहरी होगी।

आवेदन के लिए किससे संपर्क करें

विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर के माध्यम से आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को पंजीकरण की स्वीकृति और अन्य जानकारियों के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार से संपर्क करना होगा। उन्हें इस कार्यक्रम का समन्वयक नामित किया गया है। इच्छुक छात्र समन्वयक के माध्यम से कोर्स कैलेंडर, पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी ले सकते हैं।

छात्रों को क्या फायदा होगा

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस साझेदारी से विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के साथ उन्नत तकनीकी ज्ञान हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे उनके कौशल विकास और शोध क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, ISRO के शैक्षणिक कार्यक्रम से जुड़कर छात्र अंतरिक्ष विज्ञान और भू-स्थानिक तकनीकों के क्षेत्र में अपनी समझ विकसित कर सकेंगे। रिमोट सेंसिंग और GIS जैसे कौशल आज कृषि, पर्यावरण, शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन और संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम आ रहे हैं, इसलिए यह पहल छात्रों के करियर के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments