चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। शुक्रवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में अब एक नई व्यवस्था देखने को मिल रही है, जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए लोग तानाशाही की राह पर चल रहे हैं।

भगवंत मान ने कहा, ‘पहले वोटर सरकार चुनते थे, अब वोटर ही खतरे में हैं।’ उन्होंने कहा कि यदि मतदाताओं के वोट ही काट दिए जाएं और लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर न मिले तो लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है।
विधानसभा में प्रस्ताव का समर्थन
मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों में वोट काटने और नए वोट बनाने के आरोप लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि वोट का अधिकार लोकतंत्र की नींव है और इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
अंबेडकर के संविधान का हवाला
भगवंत मान ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि यदि वोट का अधिकार ही नहीं बचेगा तो संविधान की भावना कहां रह जाएगी। उन्होंने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को मताधिकार दिया है और इस अधिकार की रक्षा करना हर सरकार की जिम्मेदारी है।
SIR क्या है? जानें पूरी टाइमलाइन
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें दर्ज जानकारी का सत्यापन करना है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच कर रहे हैं और उनसे एन्यूमरेशन फॉर्म भरवा रहे हैं।
पंजाब में यह अभियान 25 जून से शुरू हुआ था। टाइमलाइन के अनुसार, 24 जुलाई तक घर-घर सत्यापन का काम जारी रहेगा। इसके बाद 3 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट) जारी किया जाएगा। यदि किसी को कोई आपत्ति या सुधार कराना होगा तो वह 2 सितंबर तक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसके बाद 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने पंजाब में 2.14 करोड़ से अधिक मतदाताओं के सत्यापन के लिए 24000 से ज्यादा बूथ लेवल अधिकारियों की तैनाती की है।

