नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की। इसरो के अग्रणी स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पेडेक्स) मिशन के दोनों उपग्रह सफलतापूर्वक पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गए हैं। इसके साथ ही करीब 22 महीने लंबे इस ऐतिहासिक मिशन का सफल समापन हो गया है।

क्या है स्पेडेक्स मिशन?
स्पेडेक्स मिशन 30 दिसंबर 2024 को प्रक्षेपित किया गया था। इस मिशन में दो उपग्रहों — स्पेडेक्स-ए और स्पेडेक्स-बी — का उपयोग करके अंतरिक्ष में स्वायत्त रूप से करीब आने और जुड़ने (डॉकिंग) की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इस तकनीक का उद्देश्य किफायती और स्वायत्त अंतरिक्ष मिलन प्रौद्योगिकियों को साबित करना था।
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की नींव
यह सफल प्रदर्शन भविष्य के जटिल अंतरिक्ष मिशनों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। अंतरिक्ष में डॉकिंग की क्षमता भविष्य में अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण, कक्षा में उपग्रहों की मरम्मत (इन-ऑर्बिट सर्विसिंग) और अंतरिक्ष मलबे को हटाने जैसे कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसरो के इस कारनामे ने उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती ताकत को एक बार फिर साबित कर दिया है।
12 और 13 अक्टूबर को हुआ पुनः प्रवेश
इसरो के अनुसार, स्पेडेक्स-ए ने 12 अक्टूबर को रात 10:18 बजे दक्षिण प्रशांत महासागर के ऊपर वायुमंडल में दोबारा प्रवेश किया। वहीं स्पेडेक्स-बी ने 13 अक्टूबर को सुबह 5:06 बजे उत्तरी अटलांटिक महासागर के ऊपर वायुमंडल में दोबारा प्रवेश किया। दोनों अंतरिक्ष यानों ने अपने सभी मुख्य मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे भविष्य के मिशनों के लिए अमूल्य डेटा प्राप्त हुआ है।
अंतरिक्ष मलबे पर बड़ा सबक
इसरो ने पुष्टि की कि परिचालन के बाद के चरण में दोनों उपग्रहों का ईंधन खत्म हो गया था। इसके बाद वे धीरे-धीरे अपनी कक्षाओं से नीचे उतरते गए, जिसके परिणामस्वरूप उनका वायुमंडलीय पुनः प्रवेश हुआ। यह नियंत्रित पुनः प्रवेश अंतरिक्ष मलबे को कम करने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह सुनिश्चित करता है कि निष्क्रिय उपग्रह कक्षा में लंबे समय तक खतरा बनकर न घूमें। अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे के बीच इसरो का यह कदम जिम्मेदार अंतरिक्ष गतिविधियों की मिसाल माना जा रहा है।

