back to top
Sunday, October 25, 2026
Homeराज्यभोपाल: नेशनल हेराल्ड जमीन विवाद में AJL को राहत, BDA याचिका खारिज

भोपाल: नेशनल हेराल्ड जमीन विवाद में AJL को राहत, BDA याचिका खारिज

नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को भोपाल के जमीन विवाद में बड़ी राहत मिली है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार को भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) की बेदखली याचिका खारिज कर दी। बीडीए ने एमपी नगर स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स की जमीन के कथित दुरुपयोग और आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई के बाद कंपनी को बेदखल करने के लिए अदालत में मामला दायर किया था।

## एजेएल की ओर से पैरवी, याचिका खारिज
एजेएल की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विकास गुप्ता ने याचिका खारिज होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बीडीए ने जमीन से बेदखली की मांग की थी। अदालत के फैसले से कंपनी को इस मामले में राहत मिली है। हालांकि, आदेश के विस्तृत कारणों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फैसले का जमीन के आवंटन, मालिकाना हक और इमारत के खरीदारों के दावों पर क्या असर पड़ेगा।

## 1981 में आवंटित हुई थी 1.14 एकड़ जमीन
यह विवाद एमपी नगर के प्रेस कॉम्प्लेक्स में स्थित करीब 1.14 एकड़ जमीन से जुड़ा है। वर्ष 1981 में यह जमीन एजेएल को आवंटित की गई थी। इसी परिसर से हिंदी दैनिक ‘नवजीवन’ का प्रकाशन होता था, जो वर्ष 1992 में बंद हो गया। बीडीए ने वर्ष 2014 में जमीन के कथित दुरुपयोग को लेकर एजेएल को नोटिस जारी किया था। कंपनी की ओर से जवाब दिया गया, लेकिन प्राधिकरण ने उसे संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद आवंटन निरस्त कर बेदखली के लिए अदालत का रुख किया गया।

## इमारत निर्माण और बिक्री से उलझा विवाद
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2001 में नई दिल्ली की गंगा एंटरप्राइजेज के नरेंद्र कुमार मित्तल ने कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर इस जमीन पर बड़ी इमारत का निर्माण कराया। बाद में इमारत के अलग-अलग हिस्से कई लोगों को बेच दिए गए। भोपाल में हरमहेंद्र सिंह बग्गा और संजय सिन्हा भी मित्तल के साथ साझेदार के तौर पर काम कर रहे थे। इमारत के हिस्से खरीदने वाले लोगों ने भी संपत्ति पर अपने-अपने अधिकार का दावा किया। कुछ खरीदारों को हाईकोर्ट से स्थगन आदेश भी मिले, जिससे विवाद लंबा खिंच गया।

## फैसले का मतलब: राहत, पर अंतिम फैसला नहीं
जिला अदालत द्वारा बीडीए की बेदखली याचिका खारिज किए जाने से एजेएल को इस मामले में राहत मिली है। लेकिन बेदखली याचिका खारिज होने को अपने आप जमीन के मालिकाना हक पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अन्य लंबित मामलों की स्थिति और आदेश के विस्तृत कारणों के आधार पर ही आगे की तस्वीर साफ होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments