भोपाल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें महंगी कार चलाने के शौक ने एक शोरूम कर्मचारी को जेल तक पहुंचा दिया। अशोका गार्डन पुलिस के अनुसार, जेके रोड स्थित फॉक्सवैगन शोरूम में काम करने वाले एक सेल्समैन ने करीब 23 लाख रुपये कीमत की कार चुरा ली। आरोपी को रविवार को गिरफ्तार किया गया और कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने शोरूमों में वाहनों की सुरक्षा और कर्मचारियों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
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28 सितंबर की रात ग्राहक की कार लेकर फरार
पुलिस के अनुसार, यह घटना 28 सितंबर की रात की है। आरोपी गजेंद्र उर्फ ऋषि आनंद फॉक्सवैगन शोरूम में सेल्समैन के तौर पर काम करता था। आरोप है कि उसने एक ग्राहक के नाम पर बुक की गई वर्टस जीटी कार को शोरूम से निकाल लिया और उसी के साथ फरार हो गया। यह कार किसी ग्राहक के लिए बुक की गई थी, इसलिए शोरूम प्रबंधन और पुलिस दोनों के लिए यह मामला गंभीर बन गया। कार की कीमत करीब 23 लाख रुपये बताई जा रही है, जो इसे एक बड़ी चोरी का मामला बनाती है। पुलिस ने शिकायत और जांच के बाद आरोपी की तलाश शुरू की थी।
पत्नी का महंगी कार चलाने का शौक बना वजह
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी की पत्नी को महंगी कार चलाने का शौक था और इसी शौक को पूरा करने के लिए उसने यह कदम उठाया। एक पल के शौक और गलत फैसले ने उसके पूरे भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। शोरूम जैसे भरोसे वाले काम में इस तरह की घटना से ग्राहकों का भरोसा भी हिलता है, क्योंकि लोग लाखों रुपये देकर कार बुक करते हैं और उसे सुरक्षित हाथों में समझते हैं। इस मामले ने यह भी दिखाया है कि शौक पूरा करने के लिए कानून तोड़ना कितना भारी पड़ सकता है।
होशंगाबाद से भोपाल आकर शोरूम में काम करता था आरोपी
जानकारी के अनुसार, आरोपी मूल रूप से होशंगाबाद का रहने वाला है। वह करीब एक साल पहले भोपाल आया था और यहां जेके रोड स्थित फॉक्सवैगन शोरूम में सेल्समैन के रूप में काम करने लगा था। भोपाल आने के बाद उसने यहां अपनी जिंदगी बसाने की कोशिश की, लेकिन कार चोरी की घटना ने सब कुछ बदल दिया। अशोका गार्डन पुलिस ने उसे रविवार को गिरफ्तार किया, इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे भी कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर और तथ्यों की जांच की जाएगी। यह मामला भोपाल ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों के शोरूम प्रबंधन के लिए भी एक सबक है कि वाहनों की चाबी, डिलीवरी और कर्मचारियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना कितना जरूरी है।

