भारत की वैष्णवी अडकर और रुतुजा भोसले ने चेन्नई ओपन टेनिस टूर्नामेंट में इतिहास रच दिया है। दोनों ने महिला युगल के फाइनल में जगह बनाकर भारतीय टेनिस में एक नया अध्याय लिख दिया है। यह पहली बार है जब डब्ल्यूटीए टूर स्तर के किसी टूर्नामेंट के युगल फाइनल में पूरी तरह से भारतीय जोड़ी पहुंची है। शनिवार को खेले गए रोमांचक सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी ने पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का और अमेरिका की अलाना स्मिथ की दूसरी वरीयता प्राप्त जोड़ी को 6-2, 2-6, 10-8 से हराया।
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पहले सेट में अडकर और भोसले पूरी तरह से नियंत्रण में दिखीं और अपने प्रतिद्वंद्वियों की गलतियों का फायदा उठाते हुए 4-1 की शानदार बढ़त हासिल कर ली। तीसरे गेम में भारतीयों को पहली सफलता तब मिली जब अडकर ने स्मिथ की दूसरी सर्व पर जोरदार रिटर्न शॉट लगाया, जिसे फाल्कोव्स्का वापस नहीं भेज पाईं। इसके बाद भारतीय जोड़ी ने यह सेट आसानी से अपने नाम कर लिया। हालांकि दूसरे सेट में खेल का रुख बदल गया और भारतीय जोड़ी ने तीसरे और पांचवें गेम में स्मिथ और फाल्कोव्स्का की सर्विस तोड़ने के मौके गंवा दिए। इससे प्रतिद्वंद्वी जोड़ी को यह सेट जीतकर मैच को निर्णायक सुपर टाई-ब्रेक तक पहुंचाने में मदद मिली।
सुपर टाई-ब्रेक में शानदार वापसी
निर्णायक सुपर टाई-ब्रेक में फाल्कोव्स्का और स्मिथ ने 3-0 की बढ़त बना ली थी, लेकिन भारतीय जोड़ी ने संयम बनाए रखते हुए अच्छी वापसी की। इसके बाद भारतीय जोड़ी एक बार फिर 6-8 से पिछड़ गई, लेकिन उन्होंने लगातार चार अंक बनाकर फाइनल में अपनी जगह सुरक्षित कर ली। यह जीत भारतीय महिला टेनिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
फाइनल में स्विस जोड़ी से मुकाबला
खिताबी मुकाबले में अडकर और भोसले का सामना स्विट्जरलैंड की नईमा करामोको और सिमोना वाल्टर की जोड़ी से होगा। स्विस जोड़ी ने नीदरलैंड की इसाबेल हावरलाग और हंगरी की पन्ना उडवार्डी को 6-4, 6-4 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इस बीच एकल वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त और गत चैंपियन जेनिस तिएन ने सेमीफाइनल में अमेरिका की रॉबिन मोंटगोमरी को 6-3, 6-4 से हराया। दूसरे सेमीफाइनल में तीसरी वरीयता प्राप्त पोलैंड की माग्दा लिनेट ने पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए रूस की सातवीं वरीयता प्राप्त अनास्तासिया जखारोवा को 2-6, 6-2, 6-3 से शिकस्त दी।
भारतीय महिला टेनिस के लिए ऐतिहासिक दिन
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले किसी भी ऐसी जोड़ी ने डब्ल्यूटीए टूर स्तर के फाइनल में जगह नहीं बनाई थी, जिसमें दोनों खिलाड़ी भारत की हों। शिखा ओबरॉय और उनकी बहन नेहा 2005 के सनफीस्ट ओपन और ग्वांगझू ओपन के फाइनल में पहुंची थीं, लेकिन नेहा ने अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया था, इसलिए वह भारत और अमेरिका की जोड़ी बन गई थी। पूर्व भारतीय खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने अपने शानदार करियर के दौरान 43 युगल खिताब जीते, लेकिन उन्होंने कभी भी किसी भारतीय खिलाड़ी के साथ जोड़ी नहीं बनाई। अंकिता रैना और करमन थंडी ने 2018 में डब्ल्यूटीए 125 युगल खिताब जीता था, जो मुख्य टूर से एक स्तर नीचे है। इसके अलावा प्रार्थना थोम्बारे ने नीदरलैंड की अपनी साथी एरियन हार्टोनो के साथ तीन डब्ल्यूटीए 125 फाइनल में जगह बनाई थी।
अडकर और भोसले की इस सफलता से भारतीय महिला टेनिस को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। अब दोनों की नजरें फाइनल जीतकर खिताब अपने नाम करने पर टिकी हैं। अगर भारतीय जोड़ी फाइनल जीत जाती है तो यह भारतीय टेनिस के इतिहास में एक और स्वर्णिम पल होगा।

