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Sunday, November 8, 2026
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दिलजीत के इंदौर शो पर टैक्स का पेंच, निगम ने जमीन मालिक को भेजा नोटिस

पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ का 15 नवंबर को इंदौर के सी-21 मैदान, बायपास पर शो होने वाला है। लेकिन शो से पहले ही मनोरंजन कर को लेकर पेंच फंस गया है। अभी तक शो कराने वाला सामने नहीं आया है, तो नगर निगम ने जहां शो हो रहा है, उस जमीन के मालिक को मनोरंजन कर का नोटिस थमा दिया है। निगम के हिसाब में कोई पुराना बकाया भी नहीं मिल रहा है और पुराने आयोजक की सीए रिपोर्ट भी जमा नहीं हुई है।

टिकटों पर 10 फीसदी मनोरंजन कर

मार्केट उपायुक्त गरिमा पाटीदार ने सी-21 एस्टेट वालों को नोटिस भेजकर दोसांझ शो का मनोरंजन कर जमा कराने को कहा है। निगम को बेचे गए टिकट पर दस फीसद मनोरंजन कर लेने का अधिकार है। इसकी वसूली आयोजक से होती है, लेकिन वह सामने नहीं आ रहा है। निगम ने वसूली के लिए जमीन मालिक को नोटिस भेज दिया है। पाटीदार ने रोज बिकने वाले टिकटों का टैक्स जमा कराने को कहा है। सीए रिपोर्ट भी मांगी गई है।

आयोजक बदला, पुराना हिसाब अटका

पता चला है कि पिछली मर्तबा जो आयोजक थे, वे इस बार नहीं हैं। आयोजक बदलने से निगम को पुराना हिसाब चुकता करने में दिक्कत हो रही है। पिछला शो सारेगामा एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड वालों ने कराया था। पिछले शो में 65 लाख रुपये का टैक्स जमा कराया था। निगम भी इससे ज्यादा का टैक्स नहीं मान रहा है। फाइनल टैक्स तो सीए रिपोर्ट के बाद ही तय होता है, जो निगम को आज तक नहीं मिली है। दोसांझ के टिकट बुक माई शो के प्लेटफार्म से बेचे जा रहे हैं, वह भी अभी तक निगम के पास नहीं पहुंचा है।

पिछली बार भी वसूली में हुई थी मुश्किल

दोसांझ ने आठ दिसंबर 2024 को इसी मैदान पर शो किया था। उसके बाद करण ओजला का शो भी इसी मैदान पर हुआ था। तब निगम को 58 लाख रुपये का टैक्स जमा हुआ था। हालांकि वसूली आसान नहीं रही थी, निगम को पैसा लेने के लिए आयोजकों का सामान जब्त करना पड़ा था। दोसांझ के शो से पहले पिछली मर्तबा की तरह हल्ला मच रहा है। शुरुआत निगम से हुई है। टैक्स के लिए बीस दिन पहले ही नोटिस थमा दिया है।

जमीन मालिक बोले — हमें तो नोटिस मिला ही नहीं

उधर सी-21 एस्टेट के मालिक पिटूं छाबड़ा का कहना है कि उन्हें अभी तक नगर निगम की तरफ से कोई नोटिस नहीं मिला है। वे तो मैदान का किराया तक नहीं ले रहे हैं। शहर में बड़े आयोजन होते रहे, इसके लिए मैदान देते हैं। पहले भी किसी से किराया नहीं लिया था, अब भी नहीं ले रहे हैं। ऐसे में हमसे टैक्स क्यों मांगा जा रहा है।

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