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Saturday, October 17, 2026
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इंदौर मेट्रो: दूसरी टीबीएम सरस्वती सुरंग खोदने को तैयार

इंदौर में भूमिगत मेट्रो का काम अब और तेज हो गया है। मेट्रो प्रबंधन ने भूमिगत कॉरिडोर के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन टीबीएम सरस्वती की लॉन्चिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इससे पहले पहली टनल बोरिंग मशीन टीबीएम नर्मदा से सुरंग निर्माण का काम चल रहा था। अब दूसरी मशीन के तैयार होने के साथ ही इंदौर मेट्रो के भूमिगत हिस्से में सुरंग निर्माण की गतिविधियों को और गति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं दूसरी ओर, भूमिगत मेट्रो के निर्माण का विरोध भी तेज होता जा रहा है और शनिवार को शहर की कई संस्थाएं और रहवासी सड़कों पर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

410 टन की विशाल मशीन शाफ्ट में उतारी गई

मेट्रो प्रबंधन के मुताबिक टीबीएम सरस्वती का वजन करीब 410 मीट्रिक टन है। मशीन के विशाल आकार और भारी वजन को देखते हुए इसे एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट में स्थापित करने के लिए विशेष इंजीनियरिंग तकनीकों की मदद ली गई। शुरुआती चरण में मशीन के अलग-अलग हिस्सों को ग्राउंड लेवल पर असेंबल किया गया। इसके बाद मेगालिफ्ट सिस्टम और स्ट्रैंड जैक असेंबली की मदद से मशीन को नियंत्रित तरीके से शाफ्ट के भीतर उतारा गया। इस काम में इस्तेमाल हुई तकनीकी प्रणाली 1,000 मीट्रिक टन से अधिक भार उठाने की क्षमता रखती है। मशीन की लॉन्चिंग के दौरान इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हर चरण की निगरानी की और सुरक्षा के तय मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया।

एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी सुरंग

मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने बताया कि इंदौर मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर के तहत एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक सुरंग निर्माण के लिए अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी क्रम में दूसरी टीबीएम सरस्वती को निर्माण कार्य के लिए तैयार किया गया है। यह मशीन जमीन के नीचे तय अलाइनमेंट के अनुसार सुरंग की खुदाई करेगी। आधुनिक तकनीक से चलने वाली टीबीएम के जरिए सुरंग निर्माण के दौरान तकनीकी सटीकता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

30 मीटर दायरे के भवनों का सर्वे, सेंसर से लगातार निगरानी

मेट्रो प्रबंधन ने भूमिगत निर्माण से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर भी जानकारी साझा की है। प्रबंध संचालक के मुताबिक भूमिगत निर्माण के दौरान आम लोगों और आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। सुरंग निर्माण क्षेत्र के आसपास करीब 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों का भवन स्थिति सर्वेक्षण किया जाता है। इसके साथ ही जमीन और भवनों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए विस्तृत इंस्ट्रूमेंटेशन स्कीम तैयार की गई है। इसके तहत लगाए जाने वाले सेंसर जमीन या भवनों में होने वाले बेहद मामूली बदलाव की भी जानकारी विशेषज्ञों को देंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते उचित कदम उठाया जा सके। टीबीएम तकनीक का अहम फायदा यह है कि सुरंग का निर्माण जमीन की सतह के काफी नीचे होता है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि जनसुरक्षा और जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए भूमिगत मेट्रो का निर्माण तय तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जा रहा है।

बंगाली चौराहा से बड़ा गणपति तक विरोध, आज रीगल पर प्रदर्शन

दूसरी ओर, बंगाली चौराहा से बड़ा गणपति तक होने वाले निर्माण कार्यों के विरोध में इन क्षेत्रों के रहवासी संघ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। शनिवार को सुबह 9.30 बजे रीगल चौराहे पर शहर की कई संस्थाएं भूमिगत मेट्रो के विरोध में प्रदर्शन करेंगी। इन संस्थाओं का कहना है कि मेट्रो के निर्माण से पर्यावरण को बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। वहीं भूमिगत मेट्रो के आसपास के रहवासी क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि इससे उनके मकानों को नुकसान पहुंचेगा। मेट्रो प्रबंधन ने इस पर दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और लखनऊ जैसे शहरों का हवाला दिया है, जहां घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूमिगत मेट्रो का निर्माण सफलतापूर्वक हुआ है और हो रहा है।

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