back to top
Friday, November 6, 2026
Homeराज्यइंदौर: महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों का सैलाब, 56 भोग

इंदौर: महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों का सैलाब, 56 भोग

दीपावली से पहले इंदौर के राजवाड़ा स्थित ऐतिहासिक महालक्ष्मी मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। राजवाड़ा के सामने दाईं ओर भारतीय स्टेट बैंक के पास स्थित यह मंदिर शहरवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। दीपावली के पांच दिनों में यहां भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। मंदिर में दीपावली के दिन विशेष श्रृंगार किया जाता है और दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। पर्व से पहले ही मंदिर परिसर में भक्तों की खासी भीड़ देखने को मिल रही है, जो शाम के समय और बढ़ जाती है।

## पांच दिन का उत्सव, 56 भोग और तीन श्रृंगार
महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली पर पांच दिवसीय उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान मां महालक्ष्मी को 56 भोग लगाया जाएगा और सुबह, दोपहर व शाम को अलग-अलग श्रृंगार में भक्तों को दर्शन होंगे। अभी से मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ है। शाम के समय कतारें और लंबी हो जाती हैं और मंदिर से गुरुद्वारा चौराहा तक भक्त खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए पुलिस ने कतार के लिए अलग-अलग बेरिकेड लगा दिए हैं। कोई महालक्ष्मी के लिए साड़ी व सोलह श्रृंगार ला रहा है तो कोई कमल के फूल लेकर आ रहा है।

## 193 साल पुराना इतिहास — होलकर काल से आस्था
महापूजन की परंपरा महाराष्ट्र में अधिक है और इंदौर को बसाने वाले होलकर राजा भी महाराष्ट्र के थे। उन्होंने शहर का भंडार धन-धान्य से भरपूर रहे, इसलिए राजवाड़ा के सम्मुख महालक्ष्मी मंदिर की स्थापना की थी। तब से आज तक यह मंदिर शहरवासियों का श्रद्धा केंद्र बना हुआ है। दीपावली पर मंदिर में फूल बंगला सजाया जाता है और लोग खूब चढ़ावा देते हैं। इस मंदिर का संचालन खासगी ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। मंदिर की स्थापना 193 वर्ष पूर्व 1832 में राजवाड़ा के सामने मल्हारराव होलकर द्वितीय के कार्यकाल में हुई थी। 1818 में मंदसौर संधि के बाद इंदौर होलकर रियासत की राजधानी बना था। राजधानी बनने के बाद नगर में रियासत के कार्यालय और राज्य के अधिकारियों की बैठकें राजवाड़ा में होने लगी थीं। आरंभ के दिनों में महालक्ष्मी मंदिर एक पुराने मकान में था और राजधानी बनने के बाद नगर में कई भवनों के साथ मंदिर भी नए सिरे से बनाया गया था।

## 1933 की आग में बची प्रतिमा
राजवाड़ा के महालक्ष्मी मंदिर में कमल पर लक्ष्मीजी विराजित हैं और सुख-समृद्धि के प्रतीक गज यानी हाथी स्थापित हैं। मंदिर में हनुमान जी, शिव, गणेश रिद्धि-सिद्धि सहित मां लक्ष्मी विराजित हैं। 1933 में हुए अग्निकांड में यह मंदिर जल गया था, लेकिन माताजी की प्रतिमा सुरक्षित बचाकर अन्य स्थान पर रखवा दी गई थी। दीपावली पर मंदिर में विशेष पूजन और अभिषेक होता है। पांच दिवसीय उत्सव में लक्ष्मीपूजा की संध्या यानी दिवाली को भक्तों की सबसे अधिक भीड़ रहती है। नवरात्र के दौरान भी भक्तगण महालक्ष्मी के दर्शन के लिए आते हैं और शुक्रवार को यहां सामान्य दिनों से अधिक भीड़ रहती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments