दीपपर्व के मौके पर इंदौर का सराफा बाजार इस बार भी अपनी पुरानी परंपरा के साथ नए अंदाज में नजर आएगा। डेढ़ शताब्दी पुराना शहर का सराफा बाजार दीपावली की रोशनी में आम दिनों से बिल्कुल अलग दिखेगा। पांच दिनों तक बाजार में परंपरागत खास सजावट होगी। सजावट की शुरुआत हो चुकी है और धनतेरस तक बाजार पूरी तरह सजकर तैयार हो जाएगा।

करीब 100 साल पुरानी सजावट की परंपरा
सराफा में दीपावली पर खास सजावट की परंपरा करीब 100 साल पुरानी है। बाजार की सड़क हमेशा की तरह इस साल भी पांचों दिन कालीन से ढंकी रहेगी। बीते दौर के दिये, कंडील और लैंटर्न की जगह अब आधुनिक लाइटिंग ने ले ली है, लेकिन परंपरा की आत्मा आज भी कायम है। करीब सौ साल पहले सजावट का सिलसिला तब शुरू हुआ था, जब दीप पर्व के पांच दिनों में व्यापारी दुकानों के बाहर कालीन बिछाकर, फूलों की सजावट कर ग्राहकों और मिलने आने वालों पर इत्र बरसाते थे। बाद के दौर में दीपक, लैंटर्न और फिर इलेक्ट्रिक लाइट ने भी सजावट में जगह बनाई।
इस बार राजस्थानी पंचरंगी छाते और लाइटें
इंदौर चांदी सोना जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन के मंत्री बसंत सोनी के अनुसार करीब 50 वर्ष से आधुनिक सजावट का जिम्मा एसोसिएशन ने ले लिया है। बीते दौर में भी दीपावली के दौरान सराफा की सजावट देखने शहरवासी पहुंचते थे, और आज भी वह परंपरा कायम है। व्यापारी एसोसिएशन हर वर्ष सजावट में कुछ नया करने की कोशिश करता है। इस बार सराफा बाजार राजस्थानी पंचरंगी छातों के साथ लाइटों से सजेगा। साथ में परंपराअनुसार पूरी सड़क को कालीन से ढंक दिया जाएगा। सजावट शुरू हो चुकी है और धनतेरस से भाईदूज तक बाजार इसी तरह सजा रहेगा। इस दौरान बाजार में आतिशबाजी भी प्रतिबंधित रहेगी।
धनतेरस पर सबसे लंबा कारोबारी दिन
धनतेरस पर सराफा बाजार वर्ष में सबसे ज्यादा समय तक खुला रहता है। इस दिन दुकानें सुबह छह बजे खुल जाएंगी और रात करीब 2 बजे तक बाजार में दुकानें खुली रहेंगी। सराफा व्यापारी एसोसिएशन के अविनाश शास्त्री के अनुसार शुभ मुहूर्त और खास दिन खरीदारी करने वाले लोग अपनी सुविधानुसार समय पर खरीदारी कर सकें, इसलिए बाजार पूरे समय खुला रहेगा। एसोसिएशन बाजार में बिकने वाले गहनों की शुद्धता की गारंटी भी दे रहा है, ताकि ग्राहक भरोसे के साथ खरीदारी कर सकें।
बर्तन और कपड़ा बाजार में भी परंपरा की झलक
सराफा बाजार से सटे अन्य पुराने बाजारों में भी परंपरा की सजावट देखने को मिलेगी। बर्तन बाजार में वर्ष में सिर्फ एक दिन खास सजावट होती है। इस दिन पूरे बाजार में पीतल और तांबे के बर्तनों के तोरणद्वार बनाए जाते हैं। भारी भरकम और अनोखे तोरण की यह परंपरा भी दशकों पुरानी है और इंदौर की त्योहारी संस्कृति का हिस्सा रही है। दूसरी ओर एमटी क्लाथ मार्केट में दुकानों पर कालीन बिछाकर पीतल के खास दीए समई की रोशनी की जाएगी। क्लाथ मार्केट मर्चेंट एसोसिएशन के अरुण बाकलीवाल के अनुसार कपड़ा बाजार में भी आतिशबाजी प्रतिबंधित रहेगी।
तीन दिन बंद रहेगी सराफा चौपाटी
सोना-चांदी व्यापारी एसोसिएशन के अनुसार खास सजावट और दीपपर्व के चलते रात्रिकालीन चाट चौपाटी को भी तीन दिनों तक बंद रखा जाएगा। धनतेरस से दीपावली तक पूरे समय बाजार सिर्फ गहनों और सोने-चांदी के बाजार के रूप में ही रहेगा। 6, 7 और 8 नवंबर को धनतेरस, रूप चौदस और महापर्व दीपावली के कारण चाट चौपाटी बंद रखी जाएगी। यानी त्योहार के इन तीन दिनों में सराफा की पहचान पूरी तरह सोने-चांदी के बाजार के रूप में रहेगी, और सजावट देखने आने वाले लोगों को बाजार का पारंपरिक रूप देखने को मिलेगा।

