इंदौर। सोने-चांदी के बाजार में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भी गिरावट का दौर जारी रहा। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में मुनाफा वसूली की तेज बिकवाली और निवेशकों की बेहद सुस्त खरीदारी के चलते शुक्रवार शाम तक दोनों धातुओं के भाव दबे रहे। इसका असर इंदौर सराफा बाजार पर भी साफ दिखा, जहां चांदी एक बार फिर दो लाख रुपये प्रति किलो के नीचे फिसल गई। ज्वेलर्स के मुताबिक घटे दामों पर त्योहारी सीजन के बाद भी खरीदारी अच्छी बनी हुई है।
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चांदी 6300 टूटी, सोना 1900 घटा
इंदौर मार्केट में शुक्रवार को चांदी चौरसा नकद 6,300 रुपये टूटकर 1,98,900 रुपये प्रति किलो पर आ गई, जो मनोवैज्ञानिक स्तर दो लाख से नीचे है। चांदी आरटीजीएस भाव 1,93,000 रुपये प्रति किलो रहा। वहीं सोना केडबरी 1,900 रुपये घटकर 1,44,500 रुपये प्रति दस ग्राम पर कारोबार करता रहा। कारोबारियों का कहना है कि सोने की तुलना में चांदी में गिरावट ज्यादा तेज रही है।
6500 टन चांदी आयात की अनुमति बनी वजह
चांदी में गिरावट की बड़ी वजह घरेलू आपूर्ति की स्थिति में सुधार बताई जा रही है। मई में चांदी के आयात पर लगी रोक और जून में नियमों को कड़ा किए जाने के बाद, भारत ने त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए अगले छह महीनों में करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी आयात करने की अनुमति दी है। इससे फिजिकल मार्केट की तंगी कम हुई है। भारत में चांदी का प्रीमियम पिछले हफ्ते के 2.50 डॉलर प्रति औंस से घटकर 0.45 डॉलर प्रति औंस रह गया है, जो इसी सुधार का संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हुआ
कॉमेक्स पर सोना वायदा 68 डॉलर टूटकर 4,021 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी वायदा 221 सेंट गिरकर 53.85 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सोना 4,032 के ऊपरी और 3,986 के निचले स्तर पर भी गया, जबकि चांदी 54.73 के ऊपर और 53.44 के नीचे तक आई। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक प्रॉफिट बुकिंग, सट्टा पोजीशनों का कमजोर होना और फिजिकल मार्केट की बदलती स्थितियां इस गिरावट के पीछे हैं। 13 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में चांदी की सट्टा ‘नेट लॉन्ग’ पोजीशन 1,874 कॉन्ट्रैक्ट घटकर 5,735 रह गई, जो तेजड़ियों के कमजोर होते रुख को दर्शाती है।
ज्वेलर्स उत्साहित, आगे क्या
घटे दामों को लेकर इंदौर के ज्वेलर्स आगे अच्छी ग्राहकी को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि सऊदी अरामको के शायबाह फील्ड पर ड्रोन हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा-जनित महंगाई की चिंताएं मौद्रिक नीति की उम्मीदों को प्रभावित कर रही हैं। व्यापक उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरें स्थिर रखेगा, लेकिन दिसंबर में बढ़ोतरी की संभावना पर बाजार की नजर बनी है।

