इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए अब एक नया प्रयोग शुरू किया गया है। शहर के चार प्रमुख चौराहों को टेस्ट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है, जहां ट्रैफिक सुधार के कई उपाय एक साथ आजमाए जाएंगे। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो यही व्यवस्था शहर के बाकी चौराहों पर भी लागू कर दी जाएगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों पर गठित सात सदस्यीय समिति ने इस योजना पर सहमति बनाई है और इसकी पहली बैठक 31 अक्टूबर को हो चुकी है।

इन चार चौराहों पर होगा प्रयोग
समिति ने रसोमा, एलआईजी, लैंटर्न और हुकुमचंद घंटाघर चौराहों को टेस्ट प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इन चौराहों पर ट्रैफिक प्रबंधन के नए उपाय लागू किए जाएंगे और उनके नतीजों का आकलन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इन चारों स्थानों पर जाम की समस्या काफी रहती है, इसलिए यहीं से शुरुआत करना सही रहेगा। प्रयोग के नतीजे सकारात्मक रहे तो शहर के अन्य चौराहों पर भी इसी तरह की व्यवस्था धीरे-धीरे लागू की जाएगी, ताकि पूरे इंदौर को जाम से राहत मिल सके।
क्या-क्या बदलाव किए जाएंगे
टेस्ट प्रोजेक्ट के तहत इन चौराहों पर लेफ्ट साइड ड्राइविंग को पूरी तरह फ्री किया गया है और रॉन्ग साइड ड्राइविंग पर सख्त रोक लगाई गई है। इसके साथ ही पीक आवर्स के दौरान सिग्नल का समय बढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि भीड़ के समय वाहनों की आवाजाही तेजी से हो सके। अनावश्यक स्पीड ब्रेकर हटाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इन सभी कदमों का मुख्य उद्देश्य शहर में ट्रैफिक की समस्या को कम करना और लोगों का सफर आसान बनाना है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी सात सदस्यीय समिति
इंदौर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 13 अक्टूबर को जारी आदेश में अधिकारियों को शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने प्रमुख ट्रैफिक चौराहों पर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने को भी कहा था, ताकि वाहनों की आवाजाही को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। इन्हीं निर्देशों के पालन में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी कर रहे हैं। समिति में जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ट्रैफिक पुलिस के उपायुक्त, एक शासकीय अधिवक्ता और एक सिविल इंजीनियर शामिल हैं। समिति की अगली बैठक 10 नवंबर को होगी, जबकि हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को तय है।
जागरूकता और 10 मिनट में मदद का प्लान
समिति ने सिर्फ नियम और इंजीनियरिंग पर ही भरोसा नहीं किया है, बल्कि नागरिक जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया है। योजना के अनुसार, स्कूलों को महीने में एक बार बच्चों के साथ नागरिक जिम्मेदारियों और यातायात जागरूकता पर मार्गदर्शन सत्र चलाने का सुझाव दिया जाएगा। उम्मीद है कि बच्चे भविष्य में वाहन चलाते समय खुद नियमों का पालन करेंगे और अपने माता-पिता को भी ट्रैफिक सिग्नल न तोड़ने और सही दिशा के लिए सही लेन में रहने की याद दिलाएंगे। इसके अलावा जाम की तुरंत सूचना देने के लिए एक विशेष ट्रैफिक समूह का गठन किया गया है। इस समूह के जरिए जाम की सूचना तुरंत संदेशों से मिलेगी, ताकि ट्रैफिक पुलिस लगभग 10 मिनट या उससे पहले वहां पहुंचकर यातायात सुचारू करवा सके। अधिकारियों का मानना है कि ट्रैफिक जागरूकता, पुलिस की मदद, थोड़ी सख्ती और बेहतर ट्रैफिक इंजीनियरिंग के मेल से ही इंदौर की जाम समस्या का स्थायी हल निकल सकता है।

