बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान अर्नब का असर मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। मंगलवार देर रात यह तूफान आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकराया, जिसके बाद इंदौर सहित पूरे प्रदेश के मौसम में अचानक बड़ा बदलाव दर्ज किया गया। इंदौर में बुधवार की सुबह तेज ठंड और घने कोहरे के साथ शुरू हुई, और शहर के कई क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। इंदौर में बुधवार को दिन का तापमान 30.2 डिग्री और मंगलवार की रात का पारा 16.4 डिग्री दर्ज किया गया।
29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अर्नब चक्रवात मध्य प्रदेश में तेज हवाओं और बारिश की स्थिति बनाएगा। राज्य के कुछ जिलों में एक दिन में 4.5 इंच से अधिक बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है, जबकि सामान्य तौर पर पूरे देश में अक्टूबर महीने की औसत बारिश 3 इंच रहती है। मौसम विभाग के अनुसार तूफान का सर्वाधिक असर 29 अक्टूबर को देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह तूफान अति प्रचंड चक्रवाती तूफान का रूप ले चुका है।
140 किमी प्रति घंटे तक की हवाएं
मौसम विभाग के अनुसार यह तूफान 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश में बापटला और विशाखापट्टनम के बीच तटीय क्षेत्र को पार कर गया। इस दौरान हवा की गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना जताई गई, जो झोंकों के साथ 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वर्ष 2014 के हुदहुद चक्रवात के बाद यह इस तटीय क्षेत्र का सबसे शक्तिशाली तूफान माना जा रहा है। आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में 12 से 20 इंच तक बारिश और 3 से 5 फीट ऊंची समुद्री लहरें उठने का अनुमान जताया गया है।
35 जिलों में बारिश, कई जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट
मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित लगभग 35 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई है। इसके विपरीत सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, कटनी, दमोह, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट घोषित किया गया है। तटीय प्रभाव के कारण अनेक जिलों में तापमान में गिरावट आएगी और अचानक ठंड बढ़ जाएगी। मौसम विज्ञानियों के अनुसार राज्य के कई जिलों में तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज होगी, हालांकि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे जाने की संभावना नहीं है। 29 अक्टूबर को करवा चौथ पर्व के दिन पूर्वी मध्य प्रदेश में घने बादलों के कारण चंद्र दर्शन में कठिनाई आ सकती है।
धान की फसल पर सबसे बड़ा खतरा
इस बेमौसम बारिश का सबसे गंभीर असर मध्य प्रदेश के धान उत्पादक क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस खरीफ सीजन में प्रदेश में लगभग 25.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई थी। राज्य में सर्वाधिक धान उत्पादन बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, शहडोल और अनूपपुर जिलों में होता है। ये सभी जिले वर्तमान में ऑरेंज अलर्ट के अंतर्गत हैं और यहां धान की कटाई का कार्य चल रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि कटी हुई फसल को खुले स्थान पर न रखें और उसे किसी सुरक्षित या ढके हुए स्थान पर स्थानांतरित करें। यदि फसल को खुले में रखना अनिवार्य हो, तो उसे मजबूत प्लास्टिक शीट से ढककर किनारों को भारी वस्तुओं से दबा दें, ताकि तेज हवा में शीट न उड़े। इसके अतिरिक्त, गर्जन और चमक के दौरान मवेशियों को पक्के शेड के नीचे सुरक्षित रखने का परामर्श दिया गया है। किसानों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखें और फसल सुरक्षा के उपाय समय रहते कर लें।

