भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने रविवार को चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में कुलसेकरपट्टिनम में बन रहे नए अंतरिक्ष केंद्र से पहला रॉकेट मार्च या अप्रैल 2027 में प्रक्षेपित किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि नए प्रक्षेपण केंद्र का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इसरो प्रमुख ने भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की प्रगति पर भी जानकारी दी। उनके अनुसार इस परियोजना में अब तक लगभग 8,000 परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले प्रणालियों की पुष्टि और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन मानवरहित अंतरिक्ष यान मिशन संचालित करने की योजना है। प्रक्षेपण की तैयारियों का पहला चरण सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है और मानवरहित परीक्षणों के सफल होने के बाद ही मानवयुक्त मिशन संचालित किया जाएगा।
चंद्रयान-4 का लक्ष्य 2028
नारायणन ने बताया कि चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 पर काम जारी है और चंद्रयान-4 को 2028 में क्रियान्वित करने की योजना है। इन मिशनों का उद्देश्य भारत के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम को अगले स्तर तक ले जाना है। नए प्रक्षेपण केंद्र से पहली उड़ान और चंद्र मिशनों की यह समयसीमा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अगले चरण की तस्वीर साफ करती है।
नेविगेशन उपग्रह से मजबूत होंगी सेवाएं
इसरो प्रमुख ने 30 अक्टूबर को जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट से प्रक्षेपित किए गए नेविगेशन उपग्रह का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उपग्रह को लगभग 38,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर प्रारंभिक अंडाकार कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था। इसके बाद उपग्रह में लगे प्रणोदन तंत्र का उपयोग करके इसकी ऊंचाई 5,500 किलोमीटर और बढ़ाई गई है और इसे निर्धारित कक्षा में स्थापित करने की आगे की प्रक्रियाएं जारी हैं। नेविगेशन तकनीक का उपयोग सार्वजनिक सुरक्षा, विमानों की लैंडिंग और उड़ान, समुद्री नेविगेशन तथा रेलवे परिचालन में किया जा सकेगा। व्यापक नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कम से कम चार उपग्रहों की आवश्यकता होती है।
56 उपग्रह अभी, हजारों की जरूरत आगे
नारायणन ने कहा कि भारत के पास वर्तमान में 56 उपग्रह हैं, लेकिन संचार, नेविगेशन, सूचना संग्रह और निगरानी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए भविष्य में हजारों और उपग्रहों की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष और सूर्य से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान से अब तक लगभग 37 टेराबाइट डेटा प्राप्त हुआ है। ये आंकड़े शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं, ताकि वैज्ञानिक समुदाय और उत्सुक पाठक दोनों इनका उपयोग कर सकें।

