मध्य प्रदेश में रबी की बुवाई के मौसम में खाद के लिए किसानों की परेशानी फिर से सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव का मुद्दा बन गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को खाद वितरण में लगातार आ रही गड़बड़ी को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार के पर्याप्त स्टॉक के दावों के बीच भी किसान लंबी कतारों में खड़े हैं, सर्वर बंद हो रहे हैं और ई-टोकन व्यवस्था में दिक्कतें आ रही हैं।
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हर साल यही हाल, कतारों और कालाबाजारी का आरोप
कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि किसानों को हर साल खाद के लिए संघर्ष करना पड़ता है। गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगती हैं, कालाबाजारी के आरोप लगते हैं और नकली खाद की आपूर्ति की शिकायतें भी सामने आती हैं। उनका कहना है कि इस साल भी हालात नहीं बदले हैं, जबकि सरकार पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का भरोसा दे रही है। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार समस्याएं पैदा करने में माहिर है और हर व्यवस्था को बिगाड़ने का हुनर रखती है। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही सरकारी नीतियों से परेशान हैं, ऐसे में उन्हें खाद पाने के लिए तकनीकी दिक्कतों से भी नहीं जूझना चाहिए।
ई-टोकन व्यवस्था पर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने ई-टोकन व्यवस्था की खामियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सर्वर ठप हो जाना, इंटरनेट की कमजोर कनेक्टिविटी और वन टाइम पासवर्ड मिलने में देरी के कारण किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। कमलनाथ ने याद दिलाया कि किसानों के विरोध के बाद पहले भी ई-टोकन व्यवस्था को रोका गया था, लेकिन सरकार ने बिना पर्याप्त तकनीकी सुधार के इसे फिर से लागू कर दिया। उनका कहना है कि जब तक व्यवस्था तकनीकी रूप से मजबूत नहीं होगी, तब तक किसानों की परेशानी खत्म नहीं होगी।
कमलनाथ की मांग, सरकार का रुख
कमलनाथ ने राज्य सरकार से मांग की है कि खाद का वितरण सुचारू और पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि यह मुद्दा हर साल कृषि संकट में न बदल जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की दिक्कतों को गंभीरता से लेना चाहिए और वितरण व्यवस्था की खामियों को तुरंत दूर करना चाहिए। उधर, भाजपा सरकार का कहना है कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खाद वितरण की व्यवस्था मध्य प्रदेश में लंबे समय से विवाद का विषय रही है, क्योंकि बुवाई के मौसम में किसान बार-बार लंबी प्रतीक्षा और आपूर्ति में दिक्कतों की शिकायत करते रहे हैं।

