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Saturday, November 7, 2026
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रैली में शामिल न होने पर MP युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी निलंबित, पार्टी में घमासान

मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी घमासान सामने आया है। दिल्ली में आयोजित रैली में शामिल न होने के कारण प्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित नेताओं ने इस कार्रवाई को एकतरफा और अलोकतांत्रिक बताया है और कहा है कि उनके पास रैली में न पहुंचने के वाजिब निजी कारण थे। इस फैसले के बाद पार्टी की प्रदेश इकाई में असंतोष खुलकर सामने आ गया है।

कौन-कौन निलंबित, क्या था मामला

युवा कांग्रेस ने तीन नवंबर को प्रदेश के पांच उपाध्यक्षों, 14 महासचिवों, 32 सचिवों और नौ जिला अध्यक्षों समेत कुल 60 पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। निलंबन आदेश में रैली में अनुपस्थित रहने को संगठनात्मक अनुशासनहीनता बताया गया था और कहा गया था कि अगले आदेश तक यह कार्रवाई प्रभावी रहेगी। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित की थी। इस रैली का नेतृत्व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किया था।

निलंबित नेताओं की दलीलें

प्रभावित नेताओं का कहना है कि वे परिवार के सदस्यों की बीमारी और अंतिम संस्कार संबंधी रस्मों जैसे वास्तविक निजी कारणों से रैली में शामिल नहीं हो सके थे। युवा कांग्रेस के निलंबित सचिव दिव्यांशु मिश्रा उर्फ अंशु ने कहा कि परिवार के एक सदस्य की तबीयत गंभीर रूप से खराब होने के कारण वह रैली में नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इसकी विधिवत जानकारी दे दी थी। अंशु ने याद दिलाया कि वह राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के लिए कश्मीर भी गए थे। मैहर के जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कहा कि वह अपने भतीजे के जन्म के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के कारण रैली में शामिल नहीं हो सके, जबकि महासचिव रोहित राजौरिया ने बताया कि 17 अक्टूबर को उनके चाचा का निधन हो गया था और वह उनकी मृत्यु के 13वें दिन आयोजित कार्यक्रम के कारण दिल्ली नहीं जा सके। राजौरिया ने यह भी बताया कि वह 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में आयोजित विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के मार्च में शामिल हुए थे।

कारण बताओ नोटिस का सवाल, भाजपा को बैठे-बिठाए मुद्दा

निलंबित नेताओं का दावा है कि निलंबन से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस तक जारी नहीं किया गया। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कई नेताओं ने इस कार्रवाई को अभूतपूर्व और अलोकतांत्रिक बताया। उनका कहना है कि पार्टी के संविधान में किसी पदाधिकारी को निलंबित करने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करने का प्रावधान है। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मीम और कार्टून प्रसारित कर रहे हैं, जिससे उन्हें अपने क्षेत्रों में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ नेताओं ने कहा कि इस कार्रवाई से उनके क्षेत्रों में उनकी बदनामी हुई है और भाजपा को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है।

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