मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। कभी बीहड़ों और बागियों के नाम से पहचानी जाने वाली चंबल की धरती के बेटे जंडेल सिंह धाकड़ को भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम का मैनेजर चुना गया है। पेशे से शासकीय शिक्षक जंडेल सिंह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। चेन्नई में 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज में वे भारतीय टीम के मैनेजर की भूमिका निभाएंगे।

चंबल के गांव से टीम इंडिया तक
जंडेल सिंह मूल रूप से मुरैना की जौरा तहसील के सुजानगढ़ी गांव के रहने वाले हैं। वर्तमान में वे ग्वालियर में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वे मध्य प्रदेश व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन के संस्थापक भी हैं और प्रदेश की व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर खिलाड़ी के रूप में खेलते हैं। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ, और अब उन्हें भारतीय टीम के प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी मिली है।
35 साल की उम्र में थामा था बल्ला
जंडेल सिंह ने बताया कि उन्होंने साल 2019 में 35 साल की उम्र में क्रिकेट का बल्ला थामा था। उस समय कई चुनौतियां सामने थीं, लेकिन मजबूत इरादों ने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया। उन्हें व्हीलचेयर क्रिकेट खेलने की प्रेरणा भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर से मिली थी। उनसे मुलाकात के दौरान उन्होंने क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली, पंजाब, ओडिशा, बेंगलुरु, जयपुर, चंडीगढ़, गोवा, लखनऊ और मुंबई सहित कई स्थानों पर अपनी प्रतिभा दिखाई। शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर वे मध्य प्रदेश टीम का नेतृत्व भी कर चुके हैं।
चेन्नई में भारत-श्रीलंका सीरीज
भारत और श्रीलंका के बीच अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज 31 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक चेन्नई में खेली जाएगी। यह सीरीज व्हीलचेयर क्रिकेट इंडिया और डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित हो रही है। इसमें जंडेल सिंह भारतीय टीम के मैनेजर की भूमिका निभाएंगे। मध्य प्रदेश व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान धर्मवीर पाल ने उन्हें बधाई देते हुए इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया है।
सपना: दिव्यांग खिलाड़ियों को समान अवसर
जंडेल सिंह का कहना है कि उनका सपना हमेशा परिवार, समाज और देश के लिए कुछ ऐसा करने का रहा है, जिससे दूसरों को प्रेरणा मिले। वे कहते हैं कि व्हीलचेयर क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और संघर्ष की पहचान है। उनका सपना दिव्यांग खिलाड़ियों को समान अवसर दिलाना है। चंबल के युवाओं को उनका संदेश है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, हौसले मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है। उनकी सफलता ने साबित किया है कि मजबूत इरादों के सामने शारीरिक चुनौतियां भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं।

