मध्य प्रदेश में छोटे और मझोले उद्योगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार 2028 तक 30 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करेगी और 5,000 उद्योगों को औद्योगिक प्लॉट देगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर अपने निवास पर आयोजित उद्यमी संवाद कार्यक्रम में इन पहलों की घोषणा की। सरकार का मकसद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को जमीन और बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराना है, ताकि छोटे उद्यमी भी बिना लंबी प्रतीक्षा के अपना कारोबार शुरू कर सकें।
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हर जिले में दो महीने में मिलेगी औद्योगिक जमीन
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अगले दो महीनों के भीतर हर जिले में MSME इकाइयों के लिए औद्योगिक जमीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश के करीब 22 जिलों में मौजूदा औद्योगिक जमीन पहले ही खत्म हो चुकी है, जिससे नए उद्यमियों को प्लॉट मिलने में दिक्कत आ रही थी। इसी कमी को दूर करने के लिए नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने और छोटे उद्यमों के लिए जमीन सुनिश्चित करने की अलग व्यवस्था की जा रही है। 30 नए औद्योगिक क्षेत्रों और 5,000 प्लॉटों से उद्यमियों के लिए अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश के औद्योगिक माहौल को मजबूती मिलेगी।
निजी निवेशक भी बना सकेंगे MSME पार्क, मिलेगी 50 लाख की मदद
अब तक औद्योगिक क्षेत्रों का विकास ज्यादातर सरकारी एजेंसियों के हाथ में रहा है, लेकिन नई व्यवस्था में निजी निवेशकों को भी MSME के लिए औद्योगिक पार्क बनाने की अनुमति मिलेगी। सरकार ऐसे पार्कों के विकास के लिए प्रति हेक्टेयर 50 लाख रुपये की वित्तीय मदद देगी। इन पार्कों में छोटे प्लॉट, फ्लेटेड फैक्ट्री और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं मिलेंगी, ताकि छोटे उद्यमों को बुनियादी ढांचा खुद जुटाने की झंझट न उठानी पड़े और वे सीधे उत्पादन शुरू कर सकें।
छोटे उद्यमों के लिए बनेगी अलग सरकारी कंपनी
सरकार एक अलग, पूरी तरह राज्य के स्वामित्व वाली MSME औद्योगिक विकास कंपनी भी बनाएगी। यह कंपनी छोटे और मझोले उद्यमों की जमीन और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों पर खास ध्यान देगी। कंपनी औद्योगिक जमीन की पहचान, अधिग्रहण, आवंटन और प्रबंधन का काम करेगी और औद्योगिक पार्क विकसित करके सड़क, बिजली, पानी और जल निकासी जैसी सुविधाएं देगी। फिलहाल मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) मुख्य रूप से 500 करोड़ रुपये से बड़े निवेश वाली बड़ी परियोजनाओं को संभालता है, इसलिए छोटे उद्यमियों के लिए अलग व्यवस्था जरूरी मानी जा रही है। इन कदमों से जमीन आवंटन में लगने वाला समय कम होगा और छोटे कारोबारियों की सरकारी एजेंसियों पर निर्भरता घटेगी।

