मध्य प्रदेश के उत्पादों को अब ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। गुरुवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में मप्र एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव का आयोजन हुआ, जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। राज्य सरकार ने भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सहयोग से यह कॉन्क्लेव आयोजित की है। इसमें एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप के साथ केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों के पदाधिकारी और प्रदेश के प्रमुख निर्यातक शामिल हुए।
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निर्यातकों के लिए शुरू हुईं पांच नई पहलें
मुख्यमंत्री ने कॉन्क्लेव में निर्यातकों को मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ दिलाने के लिए पांच अहम पहलें शुरू कीं। इनमें मप्र एफटीए कार्ययोजना 2026-27, मप्र एफटीए निर्यातक मार्गदर्शिका, मप्र एफटीए हेल्पडेस्क, एमपी ट्रेड पोर्टल का एफटीए मॉड्यूल और मप्र एफटीए एक्सेलेरेटर शामिल हैं। कार्ययोजना में उन उत्पादों, औद्योगिक समूहों और संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान की जाएगी, जिनसे प्रदेश का निर्यात बढ़ाया जा सके। मार्गदर्शिका में अलग-अलग देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों, शुल्क रियायतों, उत्पादों की पात्रता और निर्यात की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। हेल्पडेस्क निर्यातकों के सवालों का जवाब देगा और उनकी दिक्कतें सुलझाएगा, जबकि ट्रेड पोर्टल के एफटीए मॉड्यूल पर उत्पाद के हिसाब से व्यापार समझौतों और अवसरों की डिजिटल जानकारी मिलेगी। एक्सेलेरेटर के तहत उद्यमियों को प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने का मौका मिलेगा।
ब्रिटेन, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के समझौतों पर खास सत्र
कॉन्क्लेव में भारत के अलग-अलग देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से प्रदेश के निर्यातकों को मिलने वाले नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। एक विशेष तकनीकी सत्र में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापार समझौतों के तहत पहले से निर्यात कर चुके प्रदेश के उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उत्पाद की पात्रता, मूल प्रमाण पत्र, सीमा शुल्क की प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की जरूरतों को कैसे समझा जाए। वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव ने भारत के व्यापार समझौतों और राष्ट्रीय स्तर के प्रचार कार्यक्रम पर जानकारी दी, जबकि विदेश व्यापार महानिदेशालय के संयुक्त महानिदेशक अभिषेक शर्मा ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन पर प्रस्तुति दी।
2030 के निर्यात लक्ष्य और ODOP प्रदर्शनी
एक पैनल चर्चा में प्रदेश के प्रमुख उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने 2030 तक के निर्यात लक्ष्य रखे और उसके लिए जरूरी सहयोग व नीतिगत बदलावों पर अपने सुझाव दिए। इसमें वस्त्र एवं परिधान, दवा, इंजीनियरिंग एवं ऑटो कलपुर्जे, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण और रसायन उद्योग के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा से निकले सुझावों को राज्य की एफटीए कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। निर्यातकों को वित्तीय मदद, बीमा और गुणवत्ता प्रमाणन की जानकारी देने के लिए डीजीएफटी, ईसीजीसी, एपीडा, एफआईईओ, इंडिया पोस्ट, एक्जिम बैंक, सीमा शुल्क और बीआईएस की सहायता डेस्क भी लगाई गईं। साथ ही एक जिला एक उत्पाद (ODOP) प्रदर्शनी में बाग और बाटिक प्रिंट, चंदेरी वस्त्र और जरी-जरदोजी जैसे प्रदेश के पारंपरिक शिल्प दिखाए गए। समापन सत्र में जिला स्तरीय निर्यात कार्यशालाओं और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 की तैयारी पर चर्चा हुई।

