नवंबर की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के मौसम का मिजाज बदलने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह और रात के समय ठंडक महसूस की जा रही है, हालांकि दिन के समय तापमान अब भी कई जिलों में 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। मौसम विभाग के 3 नवंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में रात के तापमान में जिलों के बीच काफी अंतर देखने को मिला है। सबसे ठंडा स्थान पचमढ़ी रहा, जहां न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह उपलब्ध मौसम केंद्रों में सबसे कम न्यूनतम तापमान रहा।
![]()
रात के तापमान में बड़ा अंतर
राज्य के अन्य केंद्रों पर रात का पारा अलग-अलग रहा। भोपाल के बैरागढ़ में न्यूनतम तापमान 15.1 डिग्री, दमोह और रायसेन में 16 डिग्री, उमरिया में 16.9 डिग्री और जबलपुर में 17 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं शिवपुरी में रात का तापमान 21 डिग्री, टीकमगढ़ में 20.5 डिग्री और नर्मदापुरम में 20.2 डिग्री रहा। इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.3 डिग्री, ग्वालियर में 17.3 डिग्री, उज्जैन में 19 डिग्री, सागर में 18.1 डिग्री, रीवा में 17.4 डिग्री, खंडवा में 18 डिग्री और रायसेन में 16 डिग्री दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि पहाड़ी और मैदानी इलाकों में रात की ठंड का असर अलग-अलग महसूस हो रहा है।
दिन में गर्मी बरकरार, मंडला सबसे गर्म
दिन के समय गर्मी का असर अब भी बना हुआ है। उपलब्ध केंद्रों में सबसे अधिक अधिकतम तापमान मंडला में 33.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। इसके बाद ग्वालियर में 32.5 डिग्री, उज्जैन में 32.4 डिग्री, नर्मदापुरम में 32.2 डिग्री और धार में 32 डिग्री तापमान रहा। पचमढ़ी में अधिकतम तापमान 26.4 डिग्री, भोपाल में 30.4 डिग्री, इंदौर में 30.9 डिग्री, जबलपुर में 31.7 डिग्री, सागर में 30.8 डिग्री, रीवा में 30.8 डिग्री, खंडवा में 31.1 डिग्री, रायसेन में 31.2 डिग्री और शिवपुरी में 29 डिग्री दर्ज हुआ। यानी दिन में धूप और गर्मी अभी भी लोगों को गर्म कपड़ों से दूर रख रही है, लेकिन सुबह-शाम की ठंड धीरे-धीरे बढ़ रही है।
मुरासु तूफान का क्या रहा असर
इस बीच बंगाल की खाड़ी में उठा गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह तूफान नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के पास तट पार कर गया, उस समय हवाओं की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच रहे थे। इसके बाद तूफान उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ा और कमजोर पड़ता गया। 3 नवंबर की शाम तक इसकी गति घटकर 65 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा रह गई और आगे इसके और कमजोर होकर गहरे दबाव में बदलने की संभावना जताई गई। खास बात यह है कि 3 नवंबर को मध्य प्रदेश के 32 उपलब्ध केंद्रों पर कोई बारिश दर्ज नहीं हुई, इसलिए प्रदेश में ठंड के बढ़ने को सीधे तौर पर इस तूफान से जोड़ना सही नहीं होगा। आगे के मौसम के लिए विभाग के ताजा पूर्वानुमान और चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी होगा।

